(सईद पठान की रिपोर्ट)
संतकबीरनगर। यातायात पुलिस अक्सर लोगों की आलोचना का शिकार बनती रही है। चाहे दिन-रात सड़क पर ड्यूटी निभाकर यातायात व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश करे, फिर भी आमजन की नाराज़गी पुलिस पर भारी पड़ जाती है। लेकिन इसी आलोचना के बीच खलीलाबाद में यातायात प्रभारी परमहंस ने अपने कार्यों से न केवल आमजन बल्कि बस चालकों, परिचालकों और यात्रियों का विश्वास भी जीतना शुरू कर दिया है।
खलीलाबाद का मेहदावल बाईपास चौराहा लंबे समय से एक बड़ी समस्या से जूझ रहा था। यह चौराहा जिले का सबसे व्यस्ततम मार्ग बन चुका है, लेकिन यहां बस स्टैंड की व्यवस्था न होने से यातायात अव्यवस्थित रहता था। बस चालक और परिचालक सवारियों को बैठाने के लिए सड़क किनारे गाड़ियाँ रोकते थे, जिससे जाम और दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता था। यात्रियों को भी असुविधा झेलनी पड़ती थी।
इसी चुनौती को देखते हुए यातायात प्रभारी परमहंस ने एक नई पहल की। उन्होंने बसों के लिए बैरिकेडिंग कर अलग लेन बनवा दी, जहाँ गाड़ियाँ क्रम से खड़ी होकर यात्रियों को बैठा और उतारा जा सके। इस व्यवस्था से न केवल यातायात जाम की समस्या खत्म हुई बल्कि यात्रियों को भी सुरक्षित और सहज ढंग से बस पकड़ने की सुविधा मिलने लगी।
यातायात प्रभारी की इस पहल को लेकर रोडवेज अधिकारी टी एन दुबे, सहित कर्मचारी और स्थानीय जनता ने उनकी सराहना की है। बस चालकों और परिचालकों का कहना है कि अब उन्हें अनावश्यक विवाद या अव्यवस्था से नहीं जूझना पड़ता। वहीं यात्रियों ने इसे सड़क सुरक्षा के लिहाज़ से “जनहित में उठाया गया बड़ा कदम” बताया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह व्यवस्था भविष्य में सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन का एक मॉडल बन सकती है। अगर जिले के अन्य व्यस्त चौराहों पर भी इसी तरह की पहल की जाए, तो न केवल जाम की समस्या दूर होगी बल्कि दुर्घटनाओं की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
दरअसल, यातायात पुलिस को अक्सर केवल चालान काटने तक सीमित मान लिया जाता है, लेकिन इस उदाहरण ने यह साबित कर दिया कि संकल्प और नई सोच के साथ पुलिस जनता का भरोसा जीत सकती है और व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है।

إرسال تعليق