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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सीआरसी गोरखपुर में दिखा स्वास्थ्य और समावेशिता का संगम

 

गोरखपुर। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सीआरसी (कंपोजिट रीजनल सेंटर) गोरखपुर में आयोजित योग कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवनशैली का आधार है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिकारियों, कर्मचारियों, प्रशिक्षुओं, दिव्यांगजनों एवं उनके अभिभावकों की सहभागिता ने योग के प्रति बढ़ती जागरूकता और सामाजिक समावेशिता की भावना को भी मजबूत किया।

कार्यक्रम के दौरान योग प्रशिक्षक अनिल कुमार योगी ने उपस्थित लोगों को विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया। इस दौरान प्रशांत कुमार और नागेश्वर ने भी सहयोग प्रदान किया। योगाभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को शारीरिक फिटनेस, मानसिक शांति और आत्मानुशासन के महत्व से अवगत कराया गया।


उल्लेखनीय है कि सीआरसी गोरखपुर ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से एक दिन पूर्व आयुष विभाग द्वारा आयोजित प्रभात फेरी में भी सक्रिय भागीदारी निभाई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि संस्थान योग को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखकर जन-जागरूकता अभियान के रूप में भी आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने कहा कि योग को केवल एक दिवस के आयोजन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के साथ-साथ सामाजिक रूप से भी अधिक सक्रिय और सकारात्मक बनाता है। उनका यह संदेश वर्तमान समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है, जब भागदौड़ भरी जीवनशैली, तनाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।


यदि कार्यक्रम का समीक्षात्मक विश्लेषण किया जाए तो यह आयोजन केवल योगाभ्यास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें दिव्यांगजनों और उनके अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी ने योग के समावेशी स्वरूप को भी उजागर किया। आज जब स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ रही है, तब ऐसे कार्यक्रम समाज के हर वर्ग तक योग के लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए योग शारीरिक क्षमता, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।


हालांकि, योग दिवस के अवसर पर होने वाले आयोजनों की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब योग को वर्षभर की नियमित गतिविधि के रूप में अपनाया जाए। अक्सर देखा जाता है कि योग दिवस पर व्यापक आयोजन होते हैं, लेकिन बाद में इसकी निरंतरता कम हो जाती है। ऐसे में सीआरसी गोरखपुर जैसे संस्थानों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे योग को नियमित प्रशिक्षण और जन-जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़कर स्थायी स्वास्थ्य आंदोलन का स्वरूप दें।


कार्यक्रम का समन्वय डॉ. विजय गुप्ता द्वारा किया गया। समग्र रूप से यह आयोजन स्वास्थ्य, जागरूकता और सामाजिक सहभागिता का एक सफल उदाहरण साबित हुआ, जिसने योग के माध्यम से स्वस्थ और समावेशी समाज निर्माण का सकारात्मक संदेश दिया। #

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