(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश शासन के मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत संचालित ‘बहू–बेटी सम्मेलन’ कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए मंगलवार को खलीलाबाद विकास खंड सभागार में ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। पुलिस विभाग और यूनिसेफ के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा लैंगिक समानता के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है।
पुलिस महानिदेशक गोरखपुर जोन मुथा अशोक जैन के मार्गदर्शन तथा जिलाधिकारी आलोक कुमार एवं पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में आयोजित प्रशिक्षण में खलीलाबाद, सेमरियावां और बघौली विकास खंडों से पुलिस, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के 30 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय ने किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय और समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि ‘बहू–बेटी सम्मेलन’ महिलाओं और बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने तथा हिंसा की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण सामुदायिक पहल है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सम्मेलन की कार्यप्रणाली, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर उनकी जिम्मेदारियों, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध, लैंगिक समानता और उपलब्ध सहायता सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण को पूरी तरह व्यवहारिक और सहभागी बनाया गया, जिसमें समूह चर्चा, रोल प्ले, केस स्टडी और गतिविधि आधारित अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया।
यूनिसेफ के मंडलीय बाल संरक्षण सलाहकार राजेश कुमार सैनी ने कैस्केड प्रशिक्षण मॉडल की जानकारी देते हुए बताया कि प्रशिक्षित ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में ग्राम स्तरीय सुगमकर्ताओं को प्रशिक्षित करेंगे। इसके बाद प्रत्येक ग्राम पंचायत में 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं के साथ छह सप्ताह तक छह विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सुरक्षा, सम्मान, समानता और हिंसा की रोकथाम जैसे विषयों पर संवाद होगा।
प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर स्वीटी मंडल, मोनिका शुक्ला, महेश गुप्ता और दिग्विजय सिंह ने विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों से फीडबैक लिया गया तथा सभी ने अपने-अपने विकास खंडों में ‘बहू–बेटी सम्मेलन’ का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।
समीक्षात्मक दृष्टि
महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन भी उतना ही आवश्यक है। ‘बहू–बेटी सम्मेलन’ इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल है, जो सरकारी विभागों, स्थानीय संस्थाओं और समुदाय को एक मंच पर लाकर संवाद स्थापित करने का प्रयास करती है। हालांकि इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्राम स्तर पर प्रशिक्षण कितना प्रभावी ढंग से लागू होता है और महिलाओं की समस्याओं के समाधान में यह पहल कितना व्यवहारिक परिणाम देती है। यदि सम्मेलन नियमित, सहभागी और जवाबदेह तरीके से संचालित हुए, तो यह महिलाओं और बालिकाओं के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक सामाजिक वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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