- संतकबीरनगर में लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने जताई नाराजगी, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करने के निर्देश
Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor
संतकबीरनगर। महिला संबंधी अपराधों की विवेचना में देरी और लापरवाही को लेकर पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को रिजर्व पुलिस लाइन्स के सभागार में आयोजित अर्दली रूम के दौरान उन्होंने जिले के सभी थानों के थाना प्रभारियों और विवेचकों के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान दो विवेचकों के विरुद्ध प्रारंभिक जांच कराने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा बैठक में क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय और क्षेत्राधिकारी मेंहदावल सर्वदवन सिंह भी उपस्थित रहे। बैठक का प्रमुख केंद्र थानों में लंबे समय से लंबित महिला संबंधी अपराधों की विवेचना और उनके निस्तारण में हो रही देरी रहा।
लंबित विवेचनाओं पर जवाबदेही तय करने के निर्देश
पुलिस अधीक्षक ने लंबित मामलों की स्थिति और उनके निस्तारण में आ रही बाधाओं की विस्तार से समीक्षा की। जिन प्रकरणों के लंबे समय तक लंबित रहने का कोई उचित कारण सामने नहीं आया, उन पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। सभी विवेचकों को निर्देशित किया गया कि मामलों का निस्तारण निर्धारित समयसीमा के भीतर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से किया जाए।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि महिला संबंधी अपराधों की विवेचना में अनावश्यक देरी पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में विवेचकों से अपेक्षा की गई कि वे साक्ष्यों के संकलन, जांच की प्रगति और कानूनी प्रक्रिया को गंभीरता से लेते हुए लंबित मामलों को प्राथमिकता दें।
दो विवेचकों की प्रारंभिक जांच के आदेश
विवेचना कार्यों की समीक्षा के दौरान पुलिस अधीक्षक ने दो विवेचकों के संबंध में प्रारंभिक जांच कराने के निर्देश दिए। हालांकि, उपलब्ध पुलिस विज्ञप्ति में संबंधित विवेचकों के नाम, उनके विरुद्ध जांच के विशिष्ट कारण और संबंधित मामलों का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए जांच के निष्कर्ष आने से पहले उनके विरुद्ध किसी आरोप को प्रमाणित मानना उचित नहीं होगा।
यह कार्रवाई इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि अब समीक्षा केवल लंबित मामलों की संख्या तक सीमित नहीं रही, बल्कि विवेचना में कथित लापरवाही के मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में भी कदम उठाया गया है।
जनशिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी जोर
पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों और कर्मचारियों को जनशिकायतों की सुनवाई, त्वरित जांच तथा विधिसम्मत निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी कार्रवाई करने और भविष्य में विवेचना के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता नहीं बरतने की चेतावनी दी गई।
थाना प्रभारियों और प्रभारी निरीक्षकों को अपने अधीनस्थ विवेचकों के कार्यों की नियमित समीक्षा करने तथा मामलों का समय से निस्तारण सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
समीक्षा के बाद सबसे बड़ा सवाल: लंबित मामलों का निस्तारण कब तक?
महिला संबंधी अपराधों में समय पर जांच और निष्पक्ष विवेचना पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे मामलों में केवल बैठकें और निर्देश ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उनका असर थानों के स्तर पर दिखाई देना भी जरूरी है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस समीक्षा के बाद लंबित विवेचनाओं की संख्या में कितनी कमी आती है, पीड़ितों की शिकायतों पर कार्रवाई कितनी तेज होती है और प्रारंभिक जांच के आदेशों के आधार पर जवाबदेही किस तरह तय की जाती है। पुलिस की इस कार्रवाई का वास्तविक मूल्यांकन आगे होने वाले निस्तारण और जांच की गुणवत्ता से ही हो सकेगा।
मिशन संदेश | संतकबीरनगर
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