Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
संतकबीरनगर। बखिरा क्षेत्र में गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान हुए विवाद के बाद सामने आए विशाल कुमार के कथित अपहरण मामले में जिला पंचायत सदस्य समेत चार आरोपियों को अदालत से फिलहाल राहत नहीं मिली है। एडीजे एवं विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट चंद्र मोहन श्रीवास्तव की अदालत ने विश्वकेतु यादव, अशोक यादव, धर्मेंद्र यादव और जितेंद्र यादव की जमानत अर्जी खारिज कर दी। उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक आशीष प्रसाद पांडेय ने जमानत का विरोध किया था।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि विशाल कुमार ने इससे पहले गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए विवाद को लेकर सपा सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद विशाल के लापता होने पर उसके भाई ओमप्रकाश की शिकायत पर चार लोगों के खिलाफ अपहरण और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।
पहले विसर्जन जुलूस में विवाद, फिर लापता हुआ विशाल
मामले की शुरुआत 18 सितंबर की रात बखिरा क्षेत्र के अमरडोभा चौराहे पर गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान हुए विवाद से बताई गई है। इस घटना में दोनों पक्षों की ओर से आरोप लगाए गए और पुलिस ने अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए थे। विशाल कुमार की शिकायत में सांसद और उनके समर्थकों पर मारपीट, धमकी और अन्य आरोप लगाए गए थे, जबकि सांसद की ओर से भी जुलूस में शामिल लोगों पर हमला और वाहनों को क्षतिग्रस्त करने के आरोप लगाए गए।
इसके बाद 20 सितंबर को विशाल के भाई ओमप्रकाश ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि विशाल को विश्वकेतु यादव ने फोन करके बुलाया था। काफी देर तक घर वापस नहीं लौटने पर परिवार को अनहोनी की आशंका हुई और पुलिस से शिकायत की गई।
12 घंटे के भीतर बरामद हुआ था विशाल
पुलिस ने मामले की जांच करते हुए 21 सितंबर को विशाल को सकुशल बरामद किया था। पुलिस के अनुसार, चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया था। प्रकाशित पुलिस रिपोर्टों में बताया गया कि वाहन की तलाशी के दौरान कार, नकदी, मोबाइल फोन और विशाल से संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए गए थे।
पुलिस की कार्रवाई में विश्वकेतु यादव, अशोक यादव, धर्मेंद्र यादव और जितेंद्र यादव की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी।
अदालत में जमानत पर सुनवाई, अभियोजन ने किया विरोध
जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपों की गंभीरता को आधार बनाते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायालय ने चारों आरोपियों की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
हालांकि, जमानत खारिज होना आरोप सिद्ध होने के बराबर नहीं है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि या खंडन साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
राजनीतिक विवाद से शुरू हुआ मामला अब न्यायिक जांच के केंद्र में
पूरे घटनाक्रम को देखें तो मामला केवल एक कथित अपहरण तक सीमित नहीं है। इसकी पृष्ठभूमि में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हुआ विवाद, उसके बाद दर्ज मुकदमे और फिर उसी मामले से जुड़े युवक के लापता होने की घटना शामिल है।
अब अदालत में जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी। खास तौर पर यह महत्वपूर्ण होगा कि अभियोजन पक्ष किन साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को साबित करता है और बचाव पक्ष की ओर से अदालत के समक्ष क्या तथ्य रखे जाते हैं।
फिलहाल अदालत का आदेश चारों आरोपियों को जमानत देने से इनकार तक सीमित है; मामले में दोष या निर्दोषता का अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

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