हीरालाल इंटर कॉलेज परिसर में 22 स्टालों पर सजे दीपावली के उत्पाद; बिक्री के लिए मेले की अवधि एक दिन बढ़ाई गई, 6 नवंबर को विकास भवन परिसर में लगेगा विशेष मेला
रिपोर्ट -मोहम्मद सईद पठान एडिटर मिशन संदेश
संतकबीरनगर । दीपावली के पर्व पर बाजारों में जहां बड़ी-बड़ी दुकानों और ब्रांडेड उत्पादों की चमक दिखाई देती है, वहीं ग्रामीण महिलाओं के हुनर और आत्मनिर्भरता को मंच देने की एक सराहनीय पहल संतकबीरनगर में देखने को मिली। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा हीरालाल इंटर कॉलेज, खलीलाबाद के परिसर में सरस मेले का आयोजन किया गया है। बुधवार को जिलाधिकारी अनुज मलिक ने मेले का निरीक्षण कर महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का अवलोकन किया और उनके प्रयासों की सराहना करते हुए उत्साहवर्धन किया।
मेले में कुल 22 स्टाल लगाए गए हैं, जहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार दैनिक उपयोग और दीपावली से संबंधित उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इन स्टालों पर दीये, बाती, मोमबत्तियां, अगरबत्ती, देवी-देवताओं की मूर्तियां, सजावटी सामान, कपड़े, कॉस्मेटिक सामग्री, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, झाड़ू तथा गुड़ से निर्मित उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी अनुज मलिक ने प्रत्येक स्टाल पर पहुंचकर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से बातचीत की और उनके द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता और महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया।
जिलाधिकारी ने उपायुक्त स्वतः रोजगार को निर्देश दिया कि मेले में शेष बचे उत्पादों की बिक्री के लिए आयोजन की अवधि एक दिन और बढ़ाई जाए। इसी क्रम में 06 नवंबर 2026 को विकास भवन परिसर स्थित डीपीआरसी भवन में मेले के आयोजन का निर्णय लिया गया, ताकि समूहों की महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने का एक और अवसर मिल सके।
ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता को बाजार से जोड़ने की जरूरत
सरस मेले का आयोजन केवल दीपावली की खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के हुनर, परिश्रम और आर्थिक आत्मनिर्भरता को पहचान दिलाने का माध्यम भी है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपने कौशल के आधार पर उत्पाद तैयार कर रही हैं, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्पादों को स्थायी बाजार और उचित मूल्य दिलाने की है।
ऐसे आयोजनों से महिलाओं को अपने उत्पादों के प्रचार-प्रसार और सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। हालांकि, सवाल यह भी है कि मेले के समापन के बाद इन महिलाओं के उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होगी? क्या स्थानीय बाजारों, सरकारी संस्थानों और अन्य बिक्री केंद्रों पर भी इनके उत्पादों को नियमित स्थान मिल पाएगा?
एक दिन की अवधि बढ़ाना सराहनीय, स्थायी बाजार की भी दरकार
जिलाधिकारी द्वारा मेले की अवधि बढ़ाकर 06 नवंबर को विकास भवन परिसर में दोबारा आयोजन कराने का निर्देश महिलाओं के उत्पादों की बिक्री को अतिरिक्त अवसर देने वाला कदम है। लेकिन ग्रामीण महिलाओं की वास्तविक आर्थिक मजबूती के लिए ऐसी पहल केवल त्योहारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
जरूरत है कि स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को स्थानीय बाजार, ऑनलाइन बिक्री, सरकारी प्रदर्शनियों और अन्य व्यावसायिक मंचों से जोड़ा जाए, ताकि महिलाओं की मेहनत को नियमित आय में बदला जा सके।
सरस मेले में सजे 22 स्टाल ग्रामीण हुनर और महिला सशक्तिकरण की एक सकारात्मक तस्वीर पेश कर रहे हैं। अब इस पहल की सार्थकता इस बात से तय होगी कि इन महिलाओं को अस्थायी प्रदर्शनी से आगे बढ़कर स्थायी बाजार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का कितना मजबूत आधार मिल पाता है।


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