रबी सीजन में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता का दावा, जोत और बोई गई फसल के अनुसार होगा वितरण; बिना फार्मर रजिस्ट्री नहीं मिलेगी खाद
रिपोर्ट -मोहम्मद सईद पठान चीफ एडिटर मिशन संदेश
संतकबीरनगर । रबी सीजन में किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित कराने, उर्वरकों की कालाबाजारी और नकली खाद की बिक्री पर अंकुश लगाने तथा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की पहल की है। मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय उर्वरक समिति एवं धरती बचाओ निगरानी समिति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधियों और थोक एवं खुदरा विक्रेताओं को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि खाद के साथ किसी अन्य उत्पाद की जबरन टैगिंग करने की शिकायत मिलने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार यादव ने बताया कि जनपद में रबी अभियान के तहत फॉस्फेटिक एवं अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने कंपनियों के प्रतिनिधियों और विक्रेताओं को निर्देशित किया कि किसानों को खाद वितरण में किसी प्रकार की मनमानी न की जाए और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
जोत और फसल के आधार पर मिलेगा उर्वरक
सीडीओ ने निर्देश दिया कि किसानों को उनकी कृषि जोत और बोई गई फसलों के अनुरूप ही उर्वरकों का वितरण किया जाए। खाद वितरण के लिए फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य बताते हुए स्पष्ट किया गया कि बिना फार्मर रजिस्ट्री के किसानों को उर्वरक उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।
सहकारी समितियों के संचालन को लेकर भी सख्ती दिखाई गई। सभी समितियों को निर्धारित समय पर खोलने और प्रत्येक समिति पर खाद वितरण का रोस्टर अनिवार्य रूप से अंकित कराने के निर्देश दिए गए। इसकी जिम्मेदारी एआर कोऑपरेटिव आनंद मिश्र को सौंपी गई।
नकली खाद और कालाबाजारी पर निगरानी के लिए बनेगा मजबूत सूचना तंत्र
बैठक में जिला स्तरीय धरती बचाओ निगरानी समिति के कार्यों की भी समीक्षा की गई। उर्वरकों के संतुलित प्रयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, कालाबाजारी रोकने, नकली खाद की बिक्री और उर्वरकों के अवैध डायवर्जन पर अंकुश लगाने के लिए जिला, तहसील एवं ग्राम स्तर पर गठित समितियों को सक्रिय रखने पर जोर दिया गया।
मुख्य विकास अधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देशित किया कि ग्राम एवं तहसील स्तर पर समितियों की बैठकें नियमित रूप से समय से आयोजित कराई जाएं। साथ ही ऐसा सूचना तंत्र विकसित किया जाए, जिससे उर्वरक वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता या किसानों की समस्या की जानकारी तत्काल जिला प्रशासन तक पहुंचे और समयबद्ध कार्रवाई हो सके।
संतुलित खाद और जैविक खेती के लिए किसानों को किया जा रहा जागरूक
उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि जनपद के प्रत्येक ब्लॉक में खेत बचाओ अभियान नियमित रूप से चलाया जा रहा है। इसके तहत किसानों को उर्वरकों के संतुलित प्रयोग के साथ जैविक खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है, ताकि मिट्टी की सेहत सुरक्षित रखने के साथ कृषि उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर बनाई जा सके।
बैठक में उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार यादव, एआर कोऑपरेटिव आनंद मिश्र, जिला उद्यान अधिकारी एसजी मल्ल, डीएस पीसीएफ सहित उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधि और थोक विक्रेता उपस्थित रहे।
किसानों को राहत के दावों की असली परीक्षा वितरण व्यवस्था में
रबी सीजन में खाद की पर्याप्त उपलब्धता का दावा तभी सार्थक होगा, जब किसानों को बिना अतिरिक्त उत्पाद खरीदने की मजबूरी, अनावश्यक भागदौड़ और निर्धारित मूल्य से अधिक भुगतान के खाद उपलब्ध हो। खाद के साथ जबरन टैगिंग पर कार्रवाई की चेतावनी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता जमीनी निगरानी और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई से ही साबित होगी।
इसी तरह फार्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता लागू करते समय यह भी जरूरी होगा कि पंजीकरण संबंधी तकनीकी या दस्तावेजी परेशानियों के कारण वास्तविक किसानों को खाद से वंचित न होना पड़े। प्रशासन के सामने अब चुनौती केवल उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने की नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था को पारदर्शी, सुलभ और किसान हितैषी बनाने की भी है।

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