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ऑपरेशन कन्विक्शन: छह वर्ष पुराने पॉक्सो मामले में आरोपी को 10 साल की सजा



Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan 

संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश पुलिस के "ऑपरेशन कन्विक्शन" अभियान के तहत संतकबीरनगर पुलिस को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। करीब छह वर्ष पुराने नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने और दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 8 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय के इस फैसले को पुलिस की सशक्त विवेचना और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी का परिणाम माना जा रहा है।

पुलिस के अनुसार वर्ष 2018 में थाना बखिरा क्षेत्र के एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर ले जाने के आरोप में राकेश उर्फ ट्रॉली वर्मा निवासी ग्राम परतिया के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की विवेचना तत्कालीन क्षेत्राधिकारी मेहदावल द्वारा साक्ष्यों के आधार पर पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 एवं 376(2) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4 के तहत दोषी ठहराया। न्यायालय ने धारा 376(2) के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड, जबकि धारा 363 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 3 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने आदेश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। वहीं, धारा 366 आईपीसी और एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धारा में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया गया।

समीक्षात्मक दृष्टि

"ऑपरेशन कन्विक्शन" का उद्देश्य केवल मुकदमे दर्ज कराना नहीं, बल्कि समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण विवेचना के माध्यम से दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाना है। इस मामले में छह वर्ष बाद आया फैसला यह दर्शाता है कि यदि पुलिस विवेचना वैज्ञानिक ढंग से की जाए और अभियोजन पक्ष प्रभावी पैरवी करे, तो गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि की संभावना मजबूत होती है।

हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि ऐसे संवेदनशील मामलों का निस्तारण और अधिक तेजी से हो, ताकि पीड़ित परिवारों को वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा न करनी पड़े। महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों में त्वरित जांच, समयबद्ध सुनवाई और दोषियों को कठोर दंड ही समाज में कानून के प्रति विश्वास को मजबूत कर सकता है।

यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि नाबालिगों के विरुद्ध अपराध करने वालों के प्रति कानून सख्त है और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर उन्हें न्यायालय से कठोर सजा दिलाई जा सकती है।

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