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राजकीय जिला पुस्तकालय में सजा ज्ञान का मेला, नई पुस्तकों ने पाठकों को किया आकर्षित


संतकबीरनगर। डिजिटल दौर में पुस्तकों के प्रति नई पीढ़ी की रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से राजकीय जिला पुस्तकालय, संतकबीरनगर में शासन से प्राप्त नवीन पुस्तकों पर आधारित एक भव्य पुस्तक मेले का आयोजन किया गया। विशेष सचिव उमेश चंद्र एवं विशेष कार्याधिकारी (पुस्तकालय) शांत्वना तिवारी के निर्देशों के अनुपालन में तथा पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. सबीहा मुमताज के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों, युवाओं और पुस्तक प्रेमियों को ज्ञान के नए संसार से रूबरू कराया।

मेले में साहित्य, इतिहास, विज्ञान, प्रतियोगी परीक्षाओं, बाल साहित्य, प्रेरणादायक पुस्तकों सहित विभिन्न विषयों की नवीन पुस्तकों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया। पुस्तकालय के नियमित सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, अभिभावकों और अन्य आगंतुकों ने मेले का अवलोकन किया। नई पुस्तकों के प्रति लोगों की उत्सुकता और अध्ययन की बढ़ती रुचि ने पूरे पुस्तकालय परिसर को जीवंत बना दिया।

पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. सबीहा मुमताज ने कहा कि शासन से प्राप्त नई पुस्तकों को सीधे पाठकों तक पहुंचाने और उनमें अध्ययन की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से इस पुस्तक मेले का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें केवल जानकारी का स्रोत नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, तार्किक सोच और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण साहित्य युवाओं को सही दिशा देने में पहले से अधिक प्रासंगिक है।

उन्होंने बताया कि भविष्य में भी पुस्तक मेले, पुस्तक प्रदर्शनी और विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों का नियमित आयोजन किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग पुस्तकालय से जुड़ें और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा मिले।

समीक्षात्मक दृष्टि

आज जब मोबाइल और सोशल मीडिया युवाओं का अधिकांश समय अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं, ऐसे समय में राजकीय जिला पुस्तकालय की यह पहल अत्यंत सराहनीय है। हालांकि केवल पुस्तक मेले आयोजित कर देना पर्याप्त नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की भी है कि विद्यालयों, महाविद्यालयों और अभिभावकों को इस अभियान से जोड़कर नियमित पठन-पाठन की संस्कृति विकसित की जाए। यदि पुस्तकालयों को आधुनिक सुविधाओं, डिजिटल संसाधनों और नियमित साहित्यिक आयोजनों से समृद्ध किया जाए, तो वे युवाओं के बौद्धिक और सामाजिक विकास के प्रभावी केंद्र बन सकते हैं।

विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के लिए संदेश देते हुए पुस्तकालय प्रशासन ने कहा कि मोबाइल कुछ समय का मनोरंजन दे सकता है, लेकिन एक अच्छी पुस्तक जीवनभर का ज्ञान, संस्कार और सही दिशा प्रदान करती है। पढ़ने की आदत ही सफल, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने की सबसे मजबूत नींव है।

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