Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan
संतकबीरनगर। दहेज की लालच ने एक बेटी की जिंदगी तो छीन ली, लेकिन लगभग नौ वर्ष बाद अदालत ने दोषी पति को सजा सुनाकर न्याय व्यवस्था पर भरोसा कायम रखने का संदेश दिया। जिला एवं सत्र न्यायालय ने दहेज हत्या के मामले में दोषी पति को आठ वर्ष के कठोर कारावास तथा 15 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश रणधीर सिंह की अदालत ने सुनाया।
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) विशाल श्रीवास्तव के अनुसार, मामला जनपद बस्ती के सोनहा थाना क्षेत्र के बनरही गांव निवासी केशराम की पुत्री मान्डवी देवी की संदिग्ध मौत से जुड़ा है। मान्डवी की शादी संतकबीरनगर के दुधारा थाना क्षेत्र के मीरापुर निवासी रिंकू चौहान के साथ हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी।
अभियोजन के अनुसार, विवाह के बाद से ही पति रिंकू चौहान, बाबा पाखण्डी और चाची सास इन्द्रावती देवी अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर मान्डवी को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे। आरोप है कि 24 सितंबर 2017 को विदाई के बाद ससुराल पहुंची मान्डवी को महज तीन दिन बाद, 27 सितंबर 2017 की रात करीब नौ बजे जिंदा जलाकर मौत के घाट उतार दिया गया। इस हृदयविदारक घटना की सूचना मृतका के पिता को मोबाइल फोन पर मिली, जिसके बाद उन्होंने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस ने पति, बाबा और चाची सास के विरुद्ध दहेज हत्या समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना पूरी की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान अदालत में प्रस्तुत किए। मुकदमे की कार्यवाही के दौरान सह-आरोपी पाखण्डी और इन्द्रावती देवी की मृत्यु हो जाने के कारण उनके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त हो गई, जबकि पति रिंकू चौहान के विरुद्ध मुकदमा जारी रहा।
सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने रिंकू चौहान को दोषी ठहराते हुए आठ वर्ष के कारावास और 15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
यह फैसला केवल एक आरोपी को सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि दहेज की लालच न केवल परिवारों को उजाड़ती है, बल्कि अंततः कानून के शिकंजे तक भी पहुंचाती है। दहेज जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ सख्त कार्रवाई और समयबद्ध न्याय ही ऐसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने का मजबूत आधार बन सकता है।

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