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राष्ट्रीय लोक अदालत में 27,315 मामलों का निस्तारण, 34.29 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण वसूली

राष्ट्रीय लोक अदालत संतकबीरनगर 
(Report- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh Hindi News Paper)

संतकबीरनगर, 12 सितंबर 2026। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशन में शनिवार को जनपद संतकबीरनगर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह एवं नोडल अधिकारी कृष्ण कुमार-पंचम के नेतृत्व में आयोजित लोक अदालत में कुल 27,315 मामलों का निस्तारण किए जाने का दावा किया गया।

लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक विभागों, बैंक प्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं, पराविधिक स्वयंसेवकों और वादकारियों की मौजूदगी रही।

न्यायालयों में 4,310 मामलों का निस्तारण

आंकड़ों के अनुसार विभिन्न न्यायालयों में कुल 4,310 मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में न्यायालयों द्वारा कुल 3,40,690 रुपये का अर्थदण्ड लगाया गया, जबकि मोटर दुर्घटना से जुड़े मामलों में पीड़ितों को 2,18,78,000 रुपये का प्रतिकर दिलाया गया।

सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में 355 मामलों के निस्तारण के साथ 45,26,304 रुपये के उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र जारी किए गए। वहीं परिवार न्यायालय में 11 पारिवारिक मामलों का निस्तारण हुआ।

मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में 44 मामलों का निस्तारण करते हुए 2.18 करोड़ रुपये से अधिक का प्रतिकर दिलाया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 1,504 मामलों का निस्तारण किया गया।

प्रशासनिक विभागों और बैंकों में भी बड़ी संख्या में मामले निपटे

राष्ट्रीय लोक अदालत के आंकड़ों के मुताबिक समस्त प्रशासनिक विभागों में 22,357 मामलों का निस्तारण किया गया। वहीं बैंक एवं वित्तीय कंपनियों द्वारा 648 मामलों का निस्तारण करते हुए 3,42,92,153 रुपये की ऋण वसूली की गई।

यह आंकड़ा लोक अदालत की उस भूमिका को भी रेखांकित करता है, जिसमें लंबित विवादों के साथ-साथ बैंक ऋण से जुड़े मामलों को आपसी सहमति के आधार पर निपटाने का प्रयास किया जाता है।

वैवाहिक और प्री-लिटिगेशन मामलों पर भी जोर

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनन्या साह के प्रयासों से वैवाहिक प्री-लिटिगेशन के 20 मामलों का निस्तारण किया गया। स्थायी लोक अदालत में भी दो मामलों का आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से समाधान कराया गया।

लोक अदालत के दौरान न्यायालय परिसर में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ योजना के तहत स्टॉल तथा निःशुल्क चिकित्सा शिविर भी लगाया गया।

आंकड़ों के साथ असली कसौटी राहत की गुणवत्ता

राष्ट्रीय लोक अदालत में 27 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण निश्चित रूप से बड़ा आंकड़ा है, लेकिन लोक अदालत की सफलता केवल निस्तारित मामलों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। कितने विवाद वास्तव में स्थायी रूप से समाप्त हुए, समझौते की शर्तों का पालन हुआ या नहीं और पीड़ित/वादकारी को वास्तविक आर्थिक एवं कानूनी राहत कितनी मिली—ये सवाल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

विशेषकर ऋण वसूली और मोटर दुर्घटना प्रतिकर के मामलों में निपटारे के आंकड़ों के साथ यह देखना भी जरूरी होगा कि संबंधित पक्षों को समझौते के बाद वास्तविक भुगतान और राहत कितनी शीघ्र मिली।

नोट: प्रस्तुत आंकड़े जिला सूचना कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के आधार पर संपादित किए गए हैं।

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