- मिशन शक्ति 5.0 के तहत ‘साथ-साथ’ कार्यक्रम में पति-पत्नी और सास-बहू के विवादों में हुआ सुलह-समझौता
संतकबीरनगर,। मिशन शक्ति अभियान फेज-5.0 के द्वितीय चरण के तहत चलाए जा रहे ‘साथ-साथ’ कार्यक्रम के अंतर्गत परिवार परामर्श केन्द्र, महिला थाना संतकबीरनगर में पारिवारिक विवादों के समाधान की पहल की गई। पुलिस के अनुसार, रविवार को सामने आए सात पारिवारिक विवादों में दोनों पक्षों की काउंसलिंग कराकर आपसी सहमति से सुलह-समझौता कराया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विवादों में समझौता कराना ही नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से टूटते पारिवारिक रिश्तों को बचाने का प्रयास करना है। पुलिस के मुताबिक, परामर्श के बाद संबंधित परिवारों ने साथ रहने पर सहमति जताई।
महिला थाना की थानाध्यक्ष पूनम मौर्या की अध्यक्षता में आयोजित परामर्श प्रक्रिया में महिला कांस्टेबल विनीता सिंह, रिंकी गौतम और रम्भा यादव के साथ काउंसलर रिफातुल्लाह अंसारी मौजूद रहे।
सात मामलों में हुआ समझौता
पुलिस के अनुसार, पहले मामले में साबिया बानो और अब्दुल कादिर के बीच पारिवारिक विवाद चल रहा था। दोनों पति-पत्नी हैं और विवाद के कारण उनका रिश्ता टूटने की स्थिति में पहुंच गया था। परामर्श के बाद दोनों ने साथ रहने पर सहमति जताई।
दूसरे मामले में पुनीता और शंभू के बीच वैवाहिक विवाद था। दोनों पक्षों की काउंसलिंग के बाद आपसी सहमति से समझौता कराया गया।
तीसरे मामले में कुसुमलता और अरुण कुमार के बीच पारिवारिक विवाद सामने आया। समझाने-बुझाने के बाद दोनों ने साथ रहने की सहमति दी।
चौथे मामले में पति-पत्नी के बजाय सास-बहू के बीच विवाद था। पुलिस के अनुसार, तबस्सुम और राजिया खातून के बीच चल रहे विवाद को परामर्श के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया गया और दोनों पक्ष साथ रहने को तैयार हुए।
पांचवें मामले में आरती गुप्त और संतोष गुप्ता, छठे मामले में संगम और शिवलखन, जबकि सातवें मामले में गुड़िया और संजय विश्वकर्मा के बीच पारिवारिक विवाद था। पुलिस के मुताबिक, सभी मामलों में दोनों पक्षों को समझाने के बाद आपसी सहमति से सुलह-समझौता कराया गया।
सिर्फ समझौता नहीं, रिश्तों की निगरानी भी जरूरी
महिला थाना की यह पहल पारिवारिक विवादों को शुरुआती स्तर पर संवाद और काउंसलिंग के जरिए सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, किसी भी विवाद में तत्काल समझौता हो जाना ही स्थायी समाधान की गारंटी नहीं है। ऐसे मामलों में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में संबंधित परिवारों के बीच विवाद दोबारा न उभरे और यदि किसी पक्ष पर उत्पीड़न या हिंसा का आरोप हो तो उसकी स्वतंत्र रूप से जांच और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
‘साथ-साथ’ जैसे कार्यक्रमों की वास्तविक सफलता केवल कितने मामलों में समझौता हुआ, इससे नहीं बल्कि यह देखने से भी तय होगी कि समझौते के बाद परिवारों में संबंध कितने स्थायी और सुरक्षित बने रहे।



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