- एमएमराजभाषा के प्रयोग के साथ दिव्यांगजनों से संवाद को सहज बनाने पर जोर
Report Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh Hindi News Paper
गोरखपुर। राजभाषा हिंदी के प्रभावी प्रयोग और कार्यालयी कार्यों में हिंदी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीआरसी गोरखपुर में हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राजभाषा के व्यावहारिक प्रयोग के साथ-साथ प्रतिवेदन एवं पत्रावली लेखन की बारीकियों से अवगत कराया गया।
कार्यशाला को बतौर रिसोर्स पर्सन दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के राजभाषा विभाग के वरिष्ठ अनुवाद अधिकारी राजेश कुमार मीणा ने संबोधित किया। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राजभाषा प्रतिवेदन लेखन तथा पत्रावली लेखन की प्रक्रिया, भाषा की शुद्धता और कार्यालयी अभिलेखों में हिंदी के प्रभावी इस्तेमाल से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
दिव्यांगजनों से जुड़ाव का माध्यम बन रही हिंदी
अपने अध्यक्षीय संबोधन में सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत संस्था होने के कारण सीआरसी गोरखपुर में अधिकांश कार्य हिंदी भाषा में किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर हिंदी के प्रयोग से दिव्यांगजन और उनके अभिभावक संस्थान से सहजता से जुड़ पाते हैं तथा उन्हें उपलब्ध सुविधाओं एवं सेवाओं का लाभ लेने में आसानी होती है।
यह पहल केवल राजभाषा के सरकारी निर्देशों के अनुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध दिव्यांगजनों तक सेवाओं की पहुंच और संवाद की सहजता से भी जुड़ता है। जिस भाषा में लाभार्थी अपनी समस्या को आसानी से समझ और व्यक्त कर सके, उसी भाषा में प्रशासनिक संवाद होने से सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
कार्यालयी हिंदी को व्यवहार में उतारने पर जोर
कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कार्यालयी हिंदी केवल औपचारिक पत्राचार तक सीमित न रहे, बल्कि दैनिक प्रशासनिक कार्यों, पत्रावलियों, प्रतिवेदनों और जनसंचार में उसका सहज एवं प्रभावी प्रयोग सुनिश्चित किया जाए। इससे सरकारी कामकाज में स्पष्टता बढ़ने के साथ आम नागरिकों के साथ संवाद भी अधिक प्रभावी हो सकता है।
कार्यक्रम का संचालन सीआरसी गोरखपुर के सहायक प्राध्यापक राजेश कुमार ने किया। कार्यक्रम के अंत में विजय गुप्ता ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला में सीआरसी गोरखपुर के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि राजभाषा हिंदी का प्रभावी प्रयोग केवल भाषा के संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि प्रशासन और आमजन के बीच संवाद को अधिक सरल, सहज और सहभागी बनाने का माध्यम भी है।

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