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समाजवादी पार्टी में रोहित पांडेय की बढ़ती सक्रियता से, संतकबीरनगर की सियासत में हलचल, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं में भर रहे जोश

Report- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh Hindi News Paper 

संतकबीरनगर। कभी कांग्रेस की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी रोहित पांडेय के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद संतकबीरनगर की सियासत में एक नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। लंबे अंतराल के बाद सक्रिय राजनीति में लौटे रोहित पांडेय इन दिनों समाजवादी पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों में जिस सक्रियता के साथ नजर आ रहे हैं, उसने पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच नई ऊर्जा पैदा करने का काम किया है। खास तौर पर बूथ स्तरीय समीक्षा बैठकों और सम्मेलनों में उनकी लगातार भागीदारी उन्हें पार्टी के सक्रिय और रणनीतिक चेहरों में शामिल करती दिखाई दे रही है।

जिले में समाजवादी पार्टी की ओर से आयोजित लगभग सभी बूथ स्तरीय समीक्षा बैठकों और सम्मेलनों में रोहित पांडेय अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इन बैठकों में वह केवल औपचारिक भागीदारी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि बूथ प्रभारी, सेक्टर प्रभारी और जोनल प्रभारियों से सीधे संवाद करते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते नजर आते हैं। उनके भाषणों में चुनावी रणनीति के साथ-साथ मतदाताओं से संवाद, कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी और बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता जैसे विषय प्रमुखता से सामने आते हैं।

लंबे राजनीतिक अनुभव के साथ नई पारी

रोहित पांडेय को राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में लंबे अनुभव वाला चेहरा माना जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का एक लंबा दौर कांग्रेस पार्टी के साथ बिताया। इसी राजनीतिक यात्रा के दौरान कांग्रेस ने वर्ष 2014 में उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट देकर संसद में प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया था। हालांकि चुनावी परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं रहीं और वह लोकसभा चुनाव में सफलता हासिल नहीं कर सके।

इसके बाद व्यक्तिगत कारणों के चलते उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनानी शुरू कर दी। लगभग 12 वर्षों तक उनकी राजनीतिक सक्रियता अपेक्षाकृत सीमित रही। इस दौरान भी सामाजिक सरोकारों से उनका जुड़ाव बना रहा, लेकिन सार्वजनिक राजनीतिक मंचों पर उनकी सक्रिय मौजूदगी कम दिखाई दी।

राजनीति के इस लंबे अंतराल के बाद वर्ष 2025 में समाजवादी पार्टी में शामिल होने का उनका निर्णय राजनीतिक हलकों के लिए काफी चौंकाने वाला रहा। उनके सपा में आने को महज पार्टी परिवर्तन के रूप में नहीं, बल्कि लंबे राजनीतिक अनुभव वाले एक वरिष्ठ चेहरे की सक्रिय राजनीति में वापसी के रूप में देखा गया।

सपा के कार्यक्रमों में लगातार सक्रियता

समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद रोहित पांडेय ने जिस तरह से संगठनात्मक गतिविधियों में अपनी भागीदारी बढ़ाई है, वह पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। खास तौर पर बूथ स्तरीय बैठकों में उनकी मौजूदगी और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बूथ स्तर पर चुनावी तैयारी को लेकर उनका जोर इस बात पर रहता है कि किसी भी राजनीतिक दल की वास्तविक ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता होते हैं। बूथ प्रभारी से लेकर सेक्टर और जोनल प्रभारियों तक यदि जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन हो तो चुनावी परिणामों पर उसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। यही वजह है कि वह कार्यकर्ताओं को केवल चुनाव के समय सक्रिय होने के बजाय लगातार जनता के बीच रहने और स्थानीय समस्याओं को समझने की सलाह देते दिखाई देते हैं।

उनकी बैठकों में राजनीतिक भाषण के साथ-साथ समीक्षा का अंदाज भी देखने को मिलता है। वह कार्यकर्ताओं से यह जानने का प्रयास करते हैं कि संगठन की वास्तविक स्थिति क्या है, जनता के बीच पार्टी की स्वीकार्यता कैसी है और किन क्षेत्रों में संगठन को और मेहनत करने की जरूरत है। इस तरह उनकी भूमिका केवल वक्ता तक सीमित न रहकर एक समीक्षक और संगठन को दिशा देने वाले वरिष्ठ कार्यकर्ता के रूप में भी उभर रही है।

कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश

रोहित पांडेय की सबसे बड़ी खासियत उनके समर्थकों के अनुसार यह है कि वह कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद स्थापित करने में विश्वास रखते हैं। बूथ स्तरीय सम्मेलनों में उनके संबोधन का केंद्र अक्सर कार्यकर्ता ही होते हैं। वह कार्यकर्ताओं को यह संदेश देते नजर आते हैं कि चुनाव केवल नेताओं के दम पर नहीं, बल्कि बूथ पर खड़े हजारों कार्यकर्ताओं की मेहनत से जीते जाते हैं।

उनका मानना है कि यदि बूथ प्रभारी अपने क्षेत्र के मतदाताओं के संपर्क में लगातार रहें, उनकी समस्याओं को समझें और संगठन की नीतियों को जनता तक पहुंचाएं तो पार्टी का आधार मजबूत किया जा सकता है। यही वजह है कि उनके संबोधन के बाद स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह और सक्रियता दिखाई देने की बात पार्टी से जुड़े लोग कहते हैं।

संतकबीरनगर से मंडल तक चर्चा

रोहित पांडेय की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता का असर केवल संतकबीरनगर तक सीमित नहीं रहने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में होने लगी है। समाजवादी पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में उनके विचारों और समीक्षात्मक संबोधनों को सुनने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं का एक वर्ग उन्हें संगठन के लिए उपयोगी वरिष्ठ चेहरे के रूप में देख रहा है।

उनके समर्थकों का मानना है कि लंबे राजनीतिक अनुभव और सामाजिक क्षेत्र में सक्रियता का मिश्रण उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देता है। वह संगठन को केवल चुनावी नजरिये से नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संवाद के व्यापक दृष्टिकोण से देखने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि पार्टी के भीतर उनकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ने का दावा किया जा रहा है।

2027 के विधानसभा चुनाव पर नजर

उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। समाजवादी पार्टी भी बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की कवायद में जुटी है। ऐसे में रोहित पांडेय जैसे अनुभवी नेताओं की सक्रियता पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि चुनावी परिणामों को लेकर अभी कोई निश्चित भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना जरूर है कि बूथ स्तर पर लगातार बैठकें, कार्यकर्ताओं से संवाद और संगठन की कमियों की समीक्षा आने वाले चुनाव की तैयारियों का संकेत दे रही है। रोहित पांडेय जिस अंदाज में इन बैठकों में भागीदारी कर रहे हैं, उससे यह स्पष्ट होता है कि वह अपनी नई राजनीतिक पारी को केवल औपचारिकता तक सीमित रखने के मूड में नहीं हैं।

एक दशक से अधिक बाद सक्रिय राजनीति में वापसी

राजनीति में 12 वर्षों की अपेक्षाकृत निष्क्रियता के बाद दोबारा सक्रिय होकर लगातार संगठनात्मक कार्यक्रमों में भाग लेना अपने आप में रोहित पांडेय की राजनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कांग्रेस में बिताए लंबे राजनीतिक अनुभव के बाद समाजवादी पार्टी का दामन थामना और उसके बाद लगातार बूथ स्तर तक पहुंच बनाना यह संकेत देता है कि उन्होंने अपनी राजनीतिक भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने का निर्णय लिया है।

आज संतकबीरनगर की राजनीतिक गतिविधियों में रोहित पांडेय की मौजूदगी को नजरअंदाज करना आसान नहीं है। वह मंच से भाषण देने वाले नेता के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के बीच बैठकर संगठन की नब्ज टटोलते नजर आ रहे हैं। यही सक्रियता उन्हें समाजवादी पार्टी के भीतर एक उभरते हुए प्रभावशाली चेहरे के रूप में स्थापित कर रही है।

राजनीतिक रूप से देखा जाए तो आने वाला समय रोहित पांडेय की इस सक्रियता की वास्तविक परीक्षा भी होगा। यदि वह इसी तरह बूथ से लेकर सेक्टर और जोन स्तर तक कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बनाए रखते हैं और संगठन को लगातार सक्रिय करने में सफल होते हैं, तो 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।

फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि रोहित पांडेय की राजनीतिक वापसी अब केवल वापसी नहीं रह गई है, बल्कि वह संगठन के बीच सक्रिय भागीदारी के रूप में दिखाई देने लगी है। संतकबीरनगर में समाजवादी पार्टी के बूथ स्तरीय कार्यक्रमों में उनकी लगातार मौजूदगी, कार्यकर्ताओं से संवाद और समीक्षात्मक भाषण पार्टी के भीतर नई ऊर्जा का संचार करते नजर आ रहे हैं। आने वाले महीनों में उनकी यह सक्रियता किस तरह राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करती है, इस पर जिले की राजनीति के जानकारों और आम लोगों की निगाहें बनी रहेंगी।

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