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Santkabir Nagar News: बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाना शिक्षकों का कर्तव्य: जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह


  • "संविधान संवाद कार्यक्रम में इंटर कॉलेजों के शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण, विद्यालयों में लीगल लिटरेसी क्लब गठित करने पर जोर"

Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh 

संतकबीरनगर। बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है, बल्कि उन्हें संविधान के प्रति जागरूक, अपने अधिकारों के प्रति सजग और कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाना भी शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मंगलवार को जनपद न्यायालय के सभागार में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विभिन्न इंटर कॉलेजों के शिक्षकों के लिए *संविधान संवाद कार्यक्रम* आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों को संवैधानिक प्रावधानों, कानूनी जागरूकता और विद्यार्थियों के बीच विधिक साक्षरता को बढ़ावा देने के संबंध में प्रशिक्षित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह ने कहा कि बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाना शिक्षकों का कर्तव्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्राप्त जानकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित होगी। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया।

विद्यालयों में गठित होंगे लीगल लिटरेसी क्लब

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं न्यायिक अधिकारी अनन्या साह ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम के उद्देश्यों और विभिन्न गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कक्षा नौ से बारह तक के विद्यार्थियों के बीच *लीगल लिटरेसी क्लब* गठित करने, विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित कराने तथा अन्य जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को कानून और संविधान से जोड़ने पर जोर दिया।

उन्होंने संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों, राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों और विभिन्न संवैधानिक अनुच्छेदों की जानकारी देते हुए बताया कि विद्यार्थियों को संविधान की मूल भावना से परिचित कराना जरूरी है। इससे उनमें अधिकारों के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों की समझ विकसित करने में मदद मिल सकती है।

मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर भी दी जानकारी

लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ अन्जय कुमार श्रीवास्तव ने विभिन्न कानूनों की जानकारी देने के साथ मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में रिट दाखिल करने से संबंधित प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम, लोक अदालत, प्री-लिटिगेशन प्रक्रिया और निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में भी बताया।

उन्होंने टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर **15100** और **1098** की जानकारी देते हुए इनके उपयोग के बारे में समझाया। साथ ही आगामी एक नवंबर को आयोजित होने वाले मेगा शिविर के संबंध में भी जानकारी दी।

जागरूकता को विद्यालयों तक पहुंचाना होगी असली चुनौती

संविधान संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब प्रशिक्षण में मिली जानकारी न्यायालय सभागार तक सीमित न रहकर विद्यालयों और विद्यार्थियों तक पहुंचेगी। लीगल लिटरेसी क्लबों का गठन, नियमित गतिविधियां, संविधान आधारित प्रतियोगिताएं और बच्चों के सवालों पर संवाद इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

शिक्षकों की भूमिका यहां और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि विद्यालयी जीवन में ही बच्चों को समानता, न्याय, स्वतंत्रता, अधिकारों और कर्तव्यों का व्यावहारिक अर्थ समझाया जा सकता है। ऐसे में प्रशिक्षण के बाद इन गतिविधियों का नियमित संचालन और उनकी प्रगति की समीक्षा भी जरूरी होगी, ताकि विधिक जागरूकता केवल औपचारिक कार्यक्रम बनकर न रह जाए।

कार्यक्रम में पीडी ला कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर रंजीत चौधरी, शनि गौतम, सूर्या इंटरनेशनल एकेडमी के शरद त्रिपाठी, दिनेश चंद्र पांडेय, महेश राम, करनपुर इंटर कॉलेज के विपुल मौर्य, डॉ. मोहम्मद ताहिर अंसारी सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षक मौजूद रहे।


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