मोहम्मद सईद पठान एडिटर की रिपोर्ट | मिशन संदेश
संतकबीरनगर,। जिला कारागार की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों को मिलने वाली सुविधाओं और जेल परिसर की स्वच्छता का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सत्य प्रकाश ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जेल की विभिन्न बैरकों, महिला बैरक, पाकशाला, अस्पताल, कार्यालय और परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई तथा बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली गई। अधिकारियों ने बंदियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं के बारे में भी पूछताछ की।
निरीक्षण के दौरान कारागार के अधिकारी एवं ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी निर्धारित गणवेश में उपस्थित मिले। एसपी और एडीएम ने जेल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया कि कारागार के भीतर किसी भी परिस्थिति में प्रतिबंधित सामग्री प्रवेश न करने पाए। सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही न हो और सभी विभागीय कार्यवाहियों का निष्पादन नियमानुसार एवं पारदर्शी तरीके से किया जाए।
अधिकारियों ने जेल परिसर में स्वच्छता बनाए रखने तथा व्यवस्थाओं को बेहतर रखने के लिए संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
जिला कारागार का निरीक्षण प्रशासनिक निगरानी का नियमित हिस्सा है, लेकिन ऐसे निरीक्षणों की वास्तविक उपयोगिता केवल अधिकारियों के दौरे और निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसका असली उद्देश्य जेल के भीतर सुरक्षा, स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता और बंदियों के अधिकारों से जुड़ी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना है।
विशेष रूप से यह देखना जरूरी है कि बंदियों द्वारा बताई गई समस्याओं पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई होती है, भोजन की गुणवत्ता नियमित रूप से कैसी बनी रहती है और प्रतिबंधित सामग्री की रोकथाम के लिए सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
सवाल यह भी है कि निरीक्षण में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए क्या कोई समयबद्ध कार्ययोजना बनाई गई है और भविष्य में उसकी समीक्षा भी होगी? क्योंकि जेल की व्यवस्था केवल अनुशासन से नहीं, बल्कि सुरक्षा, मानवीय संवेदनशीलता और जवाबदेही के संतुलन से बेहतर बनती है।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक कुलदीप सिंह सहित कारागार के संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
मिशन संदेश की नजर: निरीक्षण और दिशा-निर्देश तभी सार्थक होंगे, जब उनका असर जेल की रोजमर्रा की व्यवस्था में दिखाई दे और बंदियों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं सम्मानजनक वातावरण मिल सके।



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