बेलहरकला के जंगल दशहर की घटना में सरकारी कर्मचारियों पर कुल्हाड़ी और रॉड से हमले का आरोप; सत्र न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को माना अहम
मिशन संदेश | मोहम्मद सईद पठान की रिपोर्ट
संतकबीरनगर। वन संपदा की सुरक्षा में लगे कर्मचारियों पर हमला और संरक्षित पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला अब न्यायिक स्तर पर भी गंभीरता के साथ सामने आया है। थाना बेलहरकला क्षेत्र के ग्राम जंगल दशहर में वन विभाग की टीम पर हमले और रिजर्व फॉरेस्ट की लकड़ी ले जाने के आरोप से जुड़े मामले में सत्र न्यायाधीश रणधीर सिंह ने दो अभियुक्तों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
अभियुक्त हकीमुल्लाह पुत्र मोहम्मद रजा और सरबरे आलम पुत्र हकीमुल्लाह, निवासी जंगल दशहर, थाना बेलहरकला की ओर से अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया गया था। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव के अनुसार, अदालत ने मामले की गंभीर प्रकृति को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।
पेड़ों की कटाई रोकने पहुंची वन विभाग की टीम पर हमले का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मेंहदावल रेंज में तैनात वन रक्षक गोविन्द त्रिपाठी ने 3 अक्टूबर 2026 को शाम करीब 5:30 बजे सूचना दी थी कि ग्राम जंगल दशहर में कुछ लोग वन विभाग के अधीन संरक्षित पेड़ों की अवैध कटाई कर रहे हैं। आरोप है कि हकीमुल्लाह, सदरे आलम, सरबरे आलम, फारुख और नजमुल इस गतिविधि में शामिल थे।
शिकायत के मुताबिक, वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर रिजर्व फॉरेस्ट की लकड़ी काटकर ट्रैक्टर से ले जाने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी। विरोध करने पर लोहे की कुल्हाड़ी और रॉड से वन विभाग की टीम पर हमला करने का आरोप लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष का दावा है कि हमले में सरकारी कर्मचारियों को गंभीर चोटें आईं और गला दबाकर जान से मारने का प्रयास भी किया गया। अजीत सिंह और आदित्य सिंह के घायल होने की बात भी अभियोजन की ओर से बताई गई है।
अदालत ने क्यों खारिज की अग्रिम जमानत?
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव के अनुसार, अदालत ने आरोपों की गंभीरता, सरकारी कर्मचारियों पर कथित हमले और सरकारी कार्य में बाधा डालने तथा वन संपदा की चोरी से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए दोनों अभियुक्तों की अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होना आरोपों पर अंतिम दोषसिद्धि नहीं है। मामले में आरोपों की सत्यता का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
वन संपदा की सुरक्षा पर उठते हैं गंभीर सवाल
यह मामला केवल पेड़ों की अवैध कटाई तक सीमित नहीं है। यदि वन विभाग की टीम को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय हमले और धमकी का सामना करना पड़ता है, तो इससे वन संपदा की सुरक्षा और सरकारी कर्मचारियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा दोनों प्रभावित होती हैं।
अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित क्षेत्र में अवैध कटाई रोकने के लिए वन विभाग क्या प्रभावी कदम उठाता है और घटना से जुड़े सभी आरोपों की जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है। संरक्षित वन संपदा की रक्षा के लिए निगरानी, त्वरित कार्रवाई और दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
मिशन संदेश का सवाल: क्या इस घटना के बाद जंगल दशहर और आसपास के वन क्षेत्रों में अवैध कटाई रोकने के लिए निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाएगा?

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