सुपर सीडर, किसान ड्रोन, मिनी राइस मिल समेत कई कृषि यंत्रों के लिए हुआ चयन; डीएम ने 20 नवंबर तक शत-प्रतिशत रबी बीज वितरण पूरा करने के दिए निर्देश।
Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor
संतकबीरनगर, । खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने, किसानों की लागत कम करने और फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग की अनुदान आधारित योजनाओं के तहत सोमवार को जनपद स्तरीय समिति के माध्यम से कृषि यंत्रों की ऑनलाइन ई-लॉटरी संपन्न कराई गई। इसके जरिए विभिन्न कृषि यंत्रों के लिए आवेदन करने वाले किसानों का चयन किया गया। चयनित किसानों को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद कृषि यंत्रों की खरीद पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।
जिलाधिकारी के निर्देश पर उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह की उपस्थिति में जनपद स्तरीय कार्यकारी समिति ने यह प्रक्रिया पूरी की। कृषि विभाग की सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन एवं फसल अवशेष प्रबंधन योजना के द्वितीय चरण में 18 से 30 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन टोकन बुकिंग के माध्यम से किसानों से आवेदन प्राप्त किए गए थे। सोमवार को इन्हीं आवेदनों के आधार पर ऑनलाइन ई-लॉटरी से लाभार्थियों का चयन किया गया।
इन कृषि यंत्रों के लिए हुआ किसानों का चयन
उप कृषि निदेशक ने बताया कि ई-लॉटरी के माध्यम से सुपर सीडर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर, श्रब मास्टर, कल्टीवेटर, पावर वीडर, चैफ कटर, मिनी राइस मिल, ऑयल मिल और किसान ड्रोन सहित विभिन्न कृषि यंत्रों के लिए किसानों का चयन किया गया है।
चयनित किसानों को यूपी यंत्र ट्रैकिंग पोर्टल पर पंजीकृत विक्रेताओं से ही कृषि यंत्र खरीदना होगा। खरीद के एक माह के भीतर निर्धारित पोर्टल पर बिल अपलोड करना अनिवार्य होगा। विभागीय निर्देशों के अनुसार विक्रेता को अपने बैंक खाते से कृषि यंत्र की 50 प्रतिशत धनराशि का भुगतान करना होगा। बिल कृषि यंत्र ट्रैकिंग पोर्टल और यूपी एग्रीकल्चर की वेबसाइट पर भी अपलोड करना होगा। सत्यापन के बाद पात्र किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान राशि भेजी जाएगी।
कृषि यंत्रीकरण से समय और लागत बचाने पर जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच समय काफी कम होता है। ऐसे में आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से कटाई, मड़ाई और बुवाई का कार्य समय पर पूरा किया जा सकता है। इसके साथ ही धान की पराली का इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन भी आसान होता है।
उन्होंने बताया कि कृषि यंत्रीकरण से उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। चयनित किसानों से अपील की कि वे अनुदान पर प्राप्त कृषि यंत्रों का उपयोग स्वयं करने के साथ अन्य किसानों के खेतों में भी रियायती दरों पर उपलब्ध कराएं, ताकि अधिक से अधिक किसानों को आधुनिक तकनीक का लाभ मिल सके।
रबी बीजों की कम बुकिंग पर डीएम ने जताई चिंता
कृषि यंत्रों के चयन के साथ बैठक में रबी बीज वितरण की भी समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान गेहूं, राई-सरसों और मसूर के बीजों की बुकिंग तथा वितरण की प्रगति अपेक्षा से कम पाई गई। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को 20 नवंबर तक शत-प्रतिशत बीज वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अनुदान के साथ पारदर्शिता और समयबद्ध वितरण भी जरूरी
कृषि यंत्रों पर अनुदान किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि चयनित किसानों को समय से यंत्र उपलब्ध हों और अनुदान की राशि बिना अनावश्यक देरी के उनके खातों में पहुंचे। साथ ही छोटे और सीमांत किसानों तक इन योजनाओं की पहुंच तथा अनुदानित यंत्रों का अन्य किसानों के लिए साझा उपयोग भी महत्वपूर्ण है।
वहीं, रबी बीजों की कम बुकिंग और वितरण की स्थिति कृषि विभाग के लिए चिंता का विषय है। बुवाई का समय महत्वपूर्ण होने के कारण केवल लक्ष्य निर्धारित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि किसानों तक समय से गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंचाना भी जरूरी है।
बैठक में जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार यादव, एलडीएम पवन कुमार सिन्हा, जिला उद्यान अधिकारी समुद्रगुप्त मल्ल, प्रगतिशील किसान सुरेंद्र राय सहित अन्य किसान मौजूद रहे।

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