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संतकबीरनगर: पराली जलाने पर किसान ही नहीं, कंबाइन संचालक भी होंगे जिम्मेदार, दोबारा उल्लंघन पर मशीन होगी सीज


एडीएम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति की बैठक में सख्त निर्देश, पराली जलाने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति की होगी वसूली; ग्राम पंचायतों को पराली से खाद बनाने और गोशालाओं में दान कराने की जिम्मेदारी

रिपोर्ट मोहम्मद सईद पठान एडिटर मिशन संदेश 

संतकबीरनगर, । धान की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अब खेत में पराली जलाने की घटना सामने आने पर संबंधित किसान के साथ उस खेत की कटाई करने वाले कंबाइन संचालक से भी पर्यावरण क्षतिपूर्ति की वसूली की जाएगी। बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित कंबाइन मशीन सीज करने की कार्रवाई भी होगी। इसके साथ ही बिना स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, रीपर बाइंडर अथवा बेलर के कंबाइन मशीनों के संचालन पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी के निर्देश पर सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में पराली अवशेष प्रबंधन को लेकर जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह सहित कृषि, राजस्व और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

पिछले वर्ष 34 किसानों से हुई थी 75 हजार रुपये की वसूली

बैठक में उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच कम समय होने के कारण कई किसान खेत जल्दी खाली करने के लिए पराली जला देते हैं। जबकि फसल अवशेष जलाने पर उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों के तहत प्रतिबंध है तथा उल्लंघन करने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति और अन्य विधिक कार्रवाई का प्रावधान है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जनपद में पराली जलाने के मामलों में कुल 34 किसानों से 75 हजार रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूल की गई थी। पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी सैटेलाइट के माध्यम से भी की जाती है और इसकी सूचना भारत सरकार के स्तर से प्राप्त होती है।

किसान के साथ कंबाइन संचालक पर भी होगी कार्रवाई

अपर जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों और तहसीलदारों को निर्देश दिया कि क्षेत्रीय कर्मचारियों के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं पर लगातार निगरानी रखी जाए। किसी भी खेत में पराली जलाने की घटना मिलने पर नियमानुसार क्षतिपूर्ति की वसूली की जाए। संबंधित खेत की कटाई करने वाले कंबाइन संचालक की जिम्मेदारी भी निर्धारित करते हुए उससे भी वसूली की कार्रवाई की जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर कंबाइन मशीन सीज की जाएगी। कोई भी कंबाइन मशीन स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम अथवा रीपर बाइंडर और बेलर के बिना संचालित नहीं होनी चाहिए। कृषि विभाग के कर्मचारियों को भी लगातार क्षेत्र भ्रमण कर निगरानी करने के निर्देश दिए गए।

पराली को कचरा नहीं, संसाधन बनाने पर जोर

प्रशासन ने पराली के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायतों को पराली से जैविक खाद तैयार करने और निराश्रित गोशालाओं में पराली दान कराने के निर्देश दिए हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी को ग्राम पंचायत स्तर पर इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने तथा मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को इसके लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने को कहा गया।

अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह ने पुलिस विभाग के माध्यम से भी पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी और नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही। जिला विद्यालय निरीक्षक को विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए।

फार्मर रजिस्ट्री में लापरवाही पर कर्मचारियों की जवाबदेही तय

बैठक में पराली प्रबंधन के साथ फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति की भी समीक्षा हुई। अपर जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों और तहसीलदारों को छूटे हुए किसानों की फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से पूरी कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को आ रही समस्याओं का समाधान कर रजिस्ट्री कराई जाए। चकबंदी वाले गांवों में खतौनी के डिजिटाइजेशन का कार्य जारी है, जबकि बटाईदार किसान भी भारत सरकार के एग्रीस्टैक पोर्टल पर अपनी फार्मर रजिस्ट्री करा सकते हैं।

जनसुविधा केंद्र संचालकों को भी इस कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं होने पर संबंधित क्षेत्रीय कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

सख्ती के साथ विकल्प उपलब्ध कराना भी जरूरी

पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की सख्ती पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरता बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, किसानों के सामने धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच समय की कमी, कृषि यंत्रों की उपलब्धता और पराली प्रबंधन की लागत जैसी व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं।

ऐसे में केवल जुर्माना और मशीन सीज करने की कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। किसानों को स्ट्रॉ मैनेजमेंट उपकरण, बेलर और अन्य वैकल्पिक संसाधन समय पर उपलब्ध कराना तथा पराली से खाद बनाने और गोशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करना भी जरूरी है।

अब प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि निगरानी और कार्रवाई के साथ किसानों को व्यावहारिक विकल्प भी उपलब्ध कराए जाएं, ताकि पराली जलाने की घटनाओं पर वास्तविक रूप से अंकुश लगाया जा सके।

बैठक में एसडीएम मेहदावल क्षिप्रा पाल, एसडीएम धनघटा वीरेंद्र कुमार गुप्ता, उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार यादव, तहसीलदार मेहदावल अल्पिका वर्मा, सूचना अधिकारी सुरेश कुमार सरोज सहित किसान मौजूद रहे।


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