ग्राम न्यायालय मेहदावल ने जुर्म स्वीकार करने पर सुनाया फैसला, प्रत्येक दोषी को 1100 रुपये अर्थदंड और अदालत उठने तक न्यायिक अभिरक्षा की सजा"
रिपोर्ट -मोहम्मद सईद पठान एडिटर मिशन संदेश
संतकबीरनगर। मारपीट और अपशब्द कहने के आठ वर्ष पुराने मामले में ग्राम न्यायालय मेहदावल ने एक ही परिवार के चार सदस्यों को दोषी ठहराते हुए अर्थदंड और न्यायालय उठने तक न्यायिक अभिरक्षा की सजा सुनाई है। दोषियों में पति-पत्नी और उनकी दो पुत्रियां शामिल हैं। न्यायालय ने प्रत्येक दोषी पर 1100 रुपये का अर्थदंड लगाया है। इस तरह चारों पर कुल 4400 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, थाना बखिरा में वर्ष 2018 में एनसीआर संख्या 44/2018 के तहत मारपीट और अपशब्द कहने का मामला दर्ज हुआ था। विवेचना पूरी होने के बाद विवेचक ने वर्ष 2019 में आरोपियों के विरुद्ध धारा 323 एवं 504 भारतीय दंड संहिता के तहत आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था।
मामले की सुनवाई न्यायाधिकारी ग्राम न्यायालय मेहदावल चंदन सिंह की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान आरोपियों द्वारा अपना जुर्म स्वीकार किए जाने पर न्यायालय ने थाना मेंहदावल क्षेत्र के ग्राम नौदरी निवासी राम मूरत सिंह, उनकी पत्नी विमला सिंह तथा पुत्रियों पूजा सिंह और पूर्णिमा सिंह को दंडित किया।
न्यायालय ने चारों दोषियों को 1100-1100 रुपये अर्थदंड के साथ न्यायालय उठने तक न्यायिक अभिरक्षा में रहने की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक दोषी को एक-एक माह के साधारण कारावास का दंड भुगतना होगा।
*जुर्म स्वीकार करने पर आया फैसला*
यह मामला वर्ष 2018 का है, जबकि आरोप पत्र वर्ष 2019 में दाखिल किया गया था। लंबे समय से लंबित मामले का निस्तारण आरोपियों द्वारा जुर्म स्वीकार किए जाने के बाद हुआ। यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में मामलों के शीघ्र निस्तारण और अपराध स्वीकार करने की कानूनी प्रक्रिया को भी रेखांकित करता है।
मारपीट और अपशब्द कहने जैसे विवाद भले ही सामान्य प्रतीत हों, लेकिन इनके कानूनी परिणाम संबंधित पक्षों को लंबे समय तक झेलने पड़ सकते हैं। ऐसे मामलों में आपसी विवादों को हिंसा का रूप देने के बजाय कानूनी और शांतिपूर्ण रास्ता अपनाना ही उचित है।

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