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| यातायात माह नवंबर का हुआ शुभारंभ |
हेलमेट और सीट बेल्ट के इस्तेमाल से लेकर ओवरस्पीडिंग व नशे में वाहन चलाने पर रोक तक, पूरे नवंबर चलेगा जागरूकता अभियान; एसपी का संदेश—देर से पहुंचें, लेकिन सुरक्षित पहुंचें।
Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor
संतकबीरनगर,। सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और आम नागरिकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सोमवार को जनपद में यातायात माह नवंबर 2026 का शुभारंभ किया गया। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने पुलिस कार्यालय में अभियान का उद्घाटन करते हुए यातायात जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय, क्षेत्राधिकारी धनघटा अभयनाथ मिश्र तथा यातायात प्रभारी परमहंस मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक ने वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही किसी परिवार की खुशियां छीन सकती है। दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाना, वाहन पर निर्धारित नंबर प्लेट रखना और निर्धारित गति सीमा के भीतर वाहन चलाना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने दोपहिया वाहनों पर तीन सवारी बैठाने तथा नशे की हालत में वाहन चलाने से भी परहेज करने की अपील की।
एसपी ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे केवल स्वयं यातायात नियमों का पालन न करें, बल्कि अपने परिवार, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि घर पहुंचने में भले ही देर हो जाए, लेकिन सुरक्षित पहुंचना सबसे जरूरी है।
पूरे नवंबर चलेगा जागरूकता अभियान
यातायात माह के अंतर्गत पूरे महीने जनपद के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पुलिसकर्मी आमजन को यातायात नियमों की जानकारी देंगे। इसके साथ ही जनसहभागिता के माध्यम से लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार बनाने का प्रयास किया जाएगा।
अभियान का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना, यातायात अनुशासन को आम जीवन का हिस्सा बनाना और सुरक्षित आवागमन की संस्कृति विकसित करना है।
जागरूकता के साथ जवाबदेही भी जरूरी
यातायात माह का शुभारंभ हर वर्ष सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश देता है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता केवल रैली, पोस्टर और अपील तक सीमित नहीं होनी चाहिए। हेलमेट और सीट बेल्ट के प्रति जागरूकता के साथ-साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई, ओवरस्पीडिंग पर नियंत्रण, बिना नंबर प्लेट वाहनों की जांच और प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था में सुधार भी जरूरी है।
इसके अलावा दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान, खराब संकेतकों को दुरुस्त करने और सड़क किनारे अव्यवस्थित पार्किंग पर नियंत्रण जैसे कदम भी सड़क सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अब देखना होगा कि नवंबर माह में चलने वाला यह अभियान कितनी व्यापकता से आम नागरिकों तक पहुंचता है और क्या जागरूकता के साथ यातायात व्यवस्था में भी ठोस सुधार दिखाई देता है। क्योंकि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।


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