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Santkabir Nagar News: दिव्यांग बच्चों के सपनों को मिलेगी नई उड़ान, ELIMCO के सहयोग से विधायक अनिल त्रिपाठी के हाथों, 121 बच्चों को वितरित किए गए 145 सहायक उपकरण


मेहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी ने किया उपकरण वितरण, ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर, ब्रेल किट और श्रवण यंत्र पाकर बच्चों के चेहरों पर दिखी खुशी

Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor 

संतकबीरनगर । दिव्यांगता किसी बच्चे की प्रतिभा, क्षमता और सपनों की राह में बाधा न बने, इसके लिए शासन की ओर से समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में समग्र शिक्षा अभियान के समेकित शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत एलिम्को (ALIMCO), कानपुर के सहयोग से जनपद के परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत 121 दिव्यांग बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप कुल 145 सहायक उपकरण वितरित किए गए। उपकरण पाकर बच्चों और उनके अभिभावकों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी। यह आयोजन केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मेहदावल के विधायक अनिल त्रिपाठी उपस्थित रहे। खंड शिक्षा अधिकारी गरिमा यादव ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए जिला समन्वयक डॉ. रजनीश वैद्यनाथ ने बताया कि मेहदावल तहसील क्षेत्र के बच्चों का 25 अगस्त 2026 को आकलन कर उनकी दिव्यांगता और व्यक्तिगत जरूरतों के आधार पर उपकरणों के लिए चिह्नित किया गया था। उसी आकलन के आधार पर बच्चों को ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर, रोलेटर, ब्रेल किट तथा आयु के अनुरूप शिक्षण सहायक सामग्री उपलब्ध कराई गई।

उन्होंने बताया कि इस योजना में 40 प्रतिशत धनराशि समग्र शिक्षा अभियान तथा 60 प्रतिशत धनराशि मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से एलिम्को के माध्यम से वहन की जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शारीरिक अथवा अन्य प्रकार की दिव्यांगता के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।


23 स्पेशल एजुकेटर निभा रहे महत्वपूर्ण भूमिका

जिला समन्वयक ने बताया कि वर्तमान में जनपद में 23 स्पेशल एजुकेटर कार्यरत हैं, जो परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले दिव्यांग बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप शैक्षिक सामग्री और सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बच्चों को कक्षावार एवं विषयवार लर्निंग मटेरियल उपलब्ध कराया जाता है। दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल लिपि में पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

वहीं, गंभीर दिव्यांगता के कारण विद्यालय पहुंचने में असमर्थ बच्चों के लिए होम बेस्ड एजुकेशन की व्यवस्था है। ऐसे बच्चों को स्पेशल एजुकेटर सप्ताह में एक दिन उनके घर पहुंचकर शैक्षिक सहयोग प्रदान करते हैं। यह व्यवस्था इस बात का संदेश देती है कि शिक्षा का अधिकार केवल विद्यालय तक पहुंचने वाले बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए भी है जो अपनी शारीरिक परिस्थितियों के कारण घर से बाहर नहीं निकल पाते।



अभिभावक योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं : विधायक

अपने संबोधन में विधायक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप बेसिक शिक्षा विभाग दिव्यांग बच्चों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। अभिभावकों को चाहिए कि वे इन सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करें, ताकि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का लक्ष्य पूरा हो सके।

उन्होंने कहा कि यदि जनपद में किसी दिव्यांग बच्चे को ऐसी समस्या आती है, जिसका समाधान स्थानीय स्तर पर नहीं हो पा रहा है, तो अभिभावक गोरखपुर स्थित सीआरसी (CRC) केंद्र से भी बेहतर सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।

145 उपकरणों से बच्चों को मिलेगा सहारा

कार्यक्रम में कुल 145 सहायक उपकरण वितरित किए गए। इनमें 4 ट्राई साइकिल, 13 व्हीलचेयर, 20 रोलेटर, 52 टीएलएम किट, 60 श्रवण यंत्र, 15 कैलिपर और 5 बैसाखियां शामिल रहीं।

इस अवसर पर स्पेशल एजुकेटर रत्नेशधर पाठक, शंभू, दिलीप यादव, पवन चौधरी, आशीष कुमार दुबे और अमरनाथ रंजन ने अपने-अपने विकासखंडों से बच्चों को कार्यक्रम में प्रतिभाग कराया तथा उन्हें उपकरण उपलब्ध कराने में सहयोग किया। एलिम्को के प्रतिनिधि अंबुज मिश्रा और हिमांशु सिंह, रजनीश शुक्ला (बीक्यूसी), अनंत प्रकाश राय (ब्लॉक एमआईएस) सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।



सिर्फ उपकरण नहीं, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर कदम

दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना महज सरकारी योजना का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है, जिनके बच्चे रोजमर्रा की गतिविधियों और शिक्षा हासिल करने में अनेक चुनौतियों का सामना करते हैं। ट्राई साइकिल और व्हीलचेयर जहां बच्चों की आवाजाही आसान बनाएंगी, वहीं श्रवण यंत्र, ब्रेल सामग्री और शिक्षण किट उनके सीखने की क्षमता को मजबूती देंगी।

हालांकि, इस पहल की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब उपकरण बच्चों के नियमित उपयोग में आएं, उनकी कार्यक्षमता की समय-समय पर जांच हो और जरूरत पड़ने पर मरम्मत एवं अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाए। साथ ही यह भी जरूरी है कि अभिभावकों को उपकरणों के सही उपयोग का प्रशिक्षण मिले और विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों के अनुकूल वातावरण विकसित किया जाए।

क्योंकि दिव्यांग बच्चों को केवल सहायता देना पर्याप्त नहीं, उन्हें समान अवसर, सम्मान और आत्मनिर्भर जीवन की राह देना ही समावेशी शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य है।

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