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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने सुप्रीम कोर्ट के ही वर्तमान जज जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ पर साधा निशाना, कहां औसत दर्जे का जज


नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने सुप्रीम कोर्ट के ही मौजूदा जज जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ पर निशाना साधा है। जस्टिस काटजू ने रविवार (16 फरवरी, 2020) को ट्वीट कर कहा कि चंद्रचूड़ ने भीमा कोरेगांव केस को खारिज क्यों नहीं किया? वो अयोध्या फैसले में क्यों शामिल हुए? दरअसल जस्टिस काटजू ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के एक ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने जस्टिस चंद्रचूड़ की तारीफ की। जस्टिस चंद्रचूड़ ने हाल ही में कहा था कि असहमति लोकतंत्र का ‘सेफ्टी वॉल्व’ है।


प्रशांत भूषण ने रविवार को एक खबर शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘जस्टिस चंद्रचूड़ द्वारा दिया गया शानदार भाषण।’ उनके इसी ट्वीट पर जस्टिस काटजू ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘तो ये वो भाषण है जिससे आप प्रभावित हुए, कर्मों से नहीं… उन्होंने भीमा कोरेगांव केस को खारिज क्यों नहीं किया? वो अपमानजनक अयोध्या फैसले में शामिल क्यों हुए? मेरे हिसाब से वो एक उच्च पद पर जरूर हैं, मगर पूरी तरह से औसत दर्ज के हैं।’



 जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने ‘असहमति’ को लोकतंत्र का ‘सेफ्टी वॉल्व’ करार देते हुए शनिवार (15 फरवरी, 2020) को कहा था कि असहमति को एक सिरे से राष्ट्र-विरोधी और लोकतंत्र-विरोधी बता देना संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण एवं विचार-विमर्श करने वाले लोकतंत्र को बढ़ावा देने के प्रति देश की प्रतिबद्धता के मूल विचार पर चोट करता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि असहमति पर अंकुश लगाने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल डर की भावना पैदा करता है जो कानून का शासन का उल्लंघन करता है।


जस्टिस काटूज के ट्वीट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी प्रतिक्रियाएं दी हैं। विष्णुमूर्ति FollowinYou2011 ट्वीट कर लिखते हैं, ‘यह अन्यायपूर्ण है। आप एक मौजूदा जज को औसत दर्ज का नहीं कह सकते। यह उसकी बेंच के सामने आने वाले लोगों के दिमाग में गलत छवि डालेगा। मुझे उम्मीद है कि आप इस ट्वीट को डिलीट कर देंगे।’ एक यूजर लिखते हैं, ‘आपका प्रदर्शन कैसा था सर। पब्लिक वोटिंग करा लें।’


आजादी @azaadi17 नाम से यूजर लिखते हैं, ‘वह कोर्ट में दाखिल होते वक्त दिमाग बाहर छोड़कर आते हैं।’ सुफल घोष @iacsufal लिखते हैं, ‘आप सही कह रहे हैं सर।’ वरुण @lowenhaart लिखते हैं, ‘मुझे लगता है कि वो मौजूदा सरकार को परेशान नहीं करना चाहते हैं। यह दुखद है कि लेकिन सच है।’


 


Source jansatta


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