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अब गली मोहल्लों में "योगी सरकार खुलवाएगी मयखाना",नया आदेश जारी


लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार अब गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले मयखाने खुलवाएगी, आबकारी आयुक्त पी. गुरूप्रसाद की ओर से एक नया आदेश जारी किया गया है। इस आदेश में कहा गया है कि अगले वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए शराब व बीयर की दुकानों के लाइसेंस जारी करने के लिए इन दिनों चल रही ई-लाटरी प्रक्रिया में अगर कोई दुकान व्यवस्थित नहीं होती है तो ऐसी दुकान को दो बराबर हिस्सों में बांटकर एक नई दुकान सृजित की जाएगी।


इन दोनों दुकानों का व्यवस्थापन फिर से ई-लाटरी के अगले चरण में करवाया जाएगा। आदेश में स्पष्ट है कि पहले चरण के बाद अव्यवस्थित रहने वाली दुकानों को दो बराबर हिस्सों में बांटने के बाद प्राप्त दोनों ही दुकानें मूल दुकान से संबंधित ग्राम/वार्ड/मोहल्ले में ही खोली जाएगी।



दुकानों का नाम नहीं बदलेगा बल्कि उनके आगे 'क' और 'ख' लिख दिया जाएगा। इस बार देसी व अंग्रेजी शराब, बीयर तथा माडल शाप के  लाइसेंस शुल्क में बढ़ोत्तरी की गई है। इसके अलावा लाइसेंस लेने के लिए देसी व अंग्रेजी शराब तथा बीयर की बिक्री का कोटा भी दुकानवार तय कर दिया गया है।


तमाम जिलों के कई ऐसे इलाके हैं, जहां शराब व बीयर की बिक्री निकट भविष्य में बहुत ज्यादा बढ़ने के आसार नहीं हैं, ऐसे में नुकसान का अंदेशा होने की वजह से चालू वित्तीय वर्ष में इन दुकानों को चलाने वाले लाइसेंसियों ने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करवाया।


क्यों पड़ी ऐसी जरुरत


तमाम मौजूदा लाइसेंसियों का नवीनीकरण आबकारी विभाग के कोटा व अन्य मानक पूरे न करने की वजह से नहीं हो सका। नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब बाकी बची दुकानों के लाइसेंस आवंटन के लिए पहले चरण की ई-लॉटरी से लाइसेंस आवंटन की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रदेश में इस वक्त करीब 800 से 900 के बीच देसी शराब की दुकानें व्यवस्थित होने से रह गई हैं। करीब 150 माडल शाप, 300 अंग्रेजी और इतनी ही बीयर की दुकानें भी छूट गई हैं। 


आबकारी आयुक्त के नए फरमान से अब दो सवाल उठ रहे हैं। पहला-नुकसान की आशंका के चलते जब कारोबारी जिन दुकानों को चलाने के इच्छुक नहीं हैं, क्या गारंटी है कि ऐसी दुकानों को दो हिस्सों में बांटकर लाइसेंस आवंटन से बिक्री बढ़ जाएगी और कारोबारी को नुकसान नहीं होगा। दूसरा-जब इलाके में एक शराब की दुकान खोलने और उसे चलाने में क्षेत्रीय जनता के विरोध का कारोबारियों को सामना करना पड़ता है तो ऐसे में एक ही मोहल्ले में एक और दुकान खोलने पर क्या जनविरोध नहीं होगा?


यह व्यवस्था आबकारी नीति का हिस्सा है। इससे दुकानों के व्यवस्थापन में आसानी हो जाएगी।  कोटा ज्यादा होने की वजह से ही दुकानें नहीं उठ पा रही हैं तो अब दो हिस्सों में बंट जाएगा। कहीं कोई दिक्कत नहीं आएगी।


-संजय आर.भूसरेड्डी-प्रमुख सचिव आबकारी उ.प्र.


 


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