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हत्या के प्रयास के मामले में दो अभियुक्तों को 7-7 साल की सजा, 22 हजार रुपये अर्थदंड


2018 में सरिया और भाला से युवक पर जानलेवा हमला करने का मामला, जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुनाया फैसला

By- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh 

संतकबीरनगर। करीब आठ वर्ष पुराने हत्या के प्रयास के मामले में संतकबीरनगर की जिला एवं सत्र अदालत ने दो अभियुक्तों को दोषसिद्ध करते हुए 7-7 वर्ष के साधारण कारावास और कुल 22 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। फैसला 21 सितंबर 2026 को सुनाया गया।

पुलिस के अनुसार, यह मामला महुली थाना क्षेत्र के सिकरी गांव से जुड़ा है। अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी के बाद न्यायालय ने नरेश पुत्र भागी और रामदरश पुत्र नरेश, निवासी सिकरी, को हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में दोषी माना।

सरिया और भाला से किया था हमला

मामले के अनुसार, 3 जनवरी 2018 को वादी रामसागर के पुत्र पर आरोपितों ने जान से मारने की नीयत से सरिया और भाला से पेट, सीने तथा सिर पर हमला किया था। घटना में युवक घायल हुआ था।

इसके बाद 5 जनवरी 2018 को रामसागर की तहरीर पर थाना महुली में दोनों आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।

दोनों अभियुक्तों पर अलग-अलग धाराओं में सजा

मु0अ0सं0 05/2018, थाना महुली में धारा 307 और 323 भादवि के तहत दर्ज मामले में अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषसिद्ध किया।

  • धारा 307 भादवि: दोनों अभियुक्तों को 7-7 वर्ष का साधारण कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड।
  • धारा 323 भादवि: दोनों को 6-6 माह का साधारण कारावास और 1-1 हजार रुपये अर्थदंड।
  • अर्थदंड अदा नहीं करने पर दोनों अभियुक्तों को 6-6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

आठ साल बाद आया फैसला, ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत पैरवी

मुकदमा वर्ष 2018 में दर्ज हुआ था, जबकि फैसला 21 सितंबर 2026 को आया। यानी मामले में करीब आठ वर्ष बाद न्यायालय का निर्णय सामने आया। पुलिस ने इसे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत प्रभावी पैरवी और गुणवत्तापूर्ण विवेचना का परिणाम बताया है।

हालांकि, किसी भी आपराधिक मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायालय के फैसले से ही निर्धारित होता है। इस मामले में भी न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्तों को दोषसिद्ध किए जाने के बाद सजा सुनाई गई है।

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