Report- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh Hindi News Paper
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने रविवार देर रात प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए 14 IAS और 34 PCS अधिकारियों के तबादले किए हैं। तबादला सूची में कई जिलों के मुख्य विकास अधिकारी (CDO), अपर जिलाधिकारी और मंडलीय स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। खास तौर पर सहारनपुर, लखीमपुर खीरी और अंबेडकरनगर जैसे जिलों में CDO स्तर पर बदलाव को विकास योजनाओं और प्रशासनिक निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, किसी भी बड़े तबादले को महज प्रशासनिक रूटीन मानना पर्याप्त नहीं होगा। CDO जैसे पद सीधे तौर पर जिले की विकास योजनाओं, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और ग्रामीण विकास की निगरानी से जुड़े होते हैं। ऐसे में अधिकारियों के बदलाव का वास्तविक असर आने वाले महीनों में योजनाओं की गति और जमीनी क्रियान्वयन से ही स्पष्ट होगा।
सहारनपुर और लखीमपुर खीरी में बदले CDO
तबादले के तहत सहारनपुर के CDO सुमित राजेश महाजन को उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) बनाया गया है। उनकी जगह राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त डॉ. सुनील कुमार वर्मा को सहारनपुर का नया CDO बनाया गया है।
लखीमपुर खीरी के CDO अभिषेक कुमार को विशेष सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अयोध्या के अपर जिलाधिकारी (नगर) योगानंद पांडेय को लखीमपुर खीरी का नया CDO बनाया गया है।
इन बदलावों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए अधिकारियों के सामने जिलों में लंबित विकास परियोजनाओं, राजस्व एवं जनशिकायतों तथा विभागीय योजनाओं को लेकर क्या प्राथमिकताएं होंगी और उनके कार्यकाल का मूल्यांकन किन आधारों पर किया जाएगा।
अंबेडकरनगर में भी बदला विकास विभाग का नेतृत्व
अंबेडकरनगर के CDO आनंद कुमार शुक्ला को विशेष सचिव एवं निदेशक, रेशम विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उनके स्थान पर कुशीनगर के ADM (वित्त/राजस्व) वैभव मिश्रा को अंबेडकरनगर का नया CDO बनाया गया है।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि CDO का पद जिले में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की अहम कड़ी माना जाता है। नए अधिकारी के सामने पिछली योजनाओं की प्रगति, अधूरे कार्यों और सरकार की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को गति देने की चुनौती होगी।
राजस्व परिषद और सचिवालय प्रशासन में भी बदलाव
राजस्व परिषद के सदस्य (न्यायिक) साहब सिंह को सचिवालय प्रशासन विभाग का सचिव बनाया गया है। वहीं विंध्याचल मंडल के अपर आयुक्त डॉ. विश्राम को राजस्व परिषद, प्रयागराज में सदस्य (न्यायिक) नियुक्त किया गया है।
रेशम विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक देवेंद्र कुमार सिंह कुशवाहा को भी राजस्व परिषद में सदस्य (न्यायिक) की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के विशेष सचिव राहुल सिंह को लोक निर्माण विभाग का विशेष सचिव बनाया गया है।
अन्य IAS अधिकारियों की नई तैनाती
प्रशासनिक फेरबदल में युवा कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक अशोक कुमार कनौजिया को विशेष सचिव, माध्यमिक शिक्षा विभाग बनाया गया है। अलीगढ़ मंडल के अपर आयुक्त अरुण कुमार को विशेष सचिव, ग्राम्य विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
सहारनपुर नगर निगम के अपर नगर आयुक्त प्रदीप कुमार यादव को अलीगढ़ मंडल का अपर आयुक्त बनाया गया है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग से जुड़ी अधिकारी नेहा शर्मा को सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग के पद से अवमुक्त किए जाने की बात भी तबादला सूची में शामिल है।
34 PCS अधिकारियों की भी बदली जिम्मेदारी
IAS अधिकारियों के साथ 34 PCS अधिकारियों को भी नई तैनाती दी गई है। इनमें ADM, SDM, नगर निकाय और विभिन्न विभागों में तैनात अधिकारियों के तबादले शामिल हैं।
सूची के अनुसार जंग बहादुर यादव को संयुक्त आयुक्त (प्रशासन), ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय, विश्वभूषण मिश्रा को उप सचिव, UPSSSC तथा संजय कुमार पांडेय को ADM (प्रशासन), गौतम बुद्ध नगर की जिम्मेदारी दी गई है।
इसी क्रम में अमित कुमार-2 को महाप्रबंधक, यूपी कोऑपरेटिव शुगर मिल्स फेडरेशन, मंगलेश दुबे को उप निदेशक, चकबंदी, प्रयागराज और राम शंकर को उप आयुक्त (प्रशासन), खाद्य एवं रसद विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
PCS स्तर पर बस्ती सहित कई जिलों में भी अधिकारियों की नई तैनाती की गई है। प्रद्युम्न कुमार को बस्ती का SDM बनाया गया है, जबकि शत्रुहन पाठक को बस्ती में ADM (न्यायिक) की जिम्मेदारी दी गई है। अन्य अधिकारियों को भी विभिन्न जिलों और विभागों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
तबादले के पीछे प्रशासनिक कसौटी कितनी अहम?
सरकार की ओर से ऐसे फेरबदल सामान्यतः प्रशासनिक दक्षता, बेहतर समन्वय और शासन की प्राथमिकताओं को गति देने के उद्देश्य से किए जाते हैं। लेकिन केवल पद बदलने से प्रशासनिक प्रदर्शन बेहतर हो जाए, यह जरूरी नहीं है।
असल कसौटी यह होगी कि नए अधिकारी जनशिकायतों के निस्तारण, विकास योजनाओं की गुणवत्ता, राजस्व मामलों, कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक समन्वय और सरकारी योजनाओं के वास्तविक लाभ को कितनी तेजी से जमीनी स्तर तक पहुंचाते हैं।
खासकर CDO स्तर के बदलावों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या नए अधिकारी लंबित परियोजनाओं की समीक्षा करके समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित कर पाते हैं या तबादला केवल प्रशासनिक फेरबदल तक सीमित रह जाता है।
मिशन संदेश की नजर में अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि किस अधिकारी को कहां भेजा गया, बल्कि यह भी है कि नई तैनाती के बाद संबंधित जिलों में शासन की योजनाओं और आम जनता से जुड़े कामकाज में कितना ठोस बदलाव दिखाई देता है।

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