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30 करोड़ की निवेश ठगी का महुली पुलिस ने किया बड़ा खुलासा, दो और आरोपी गिरफ्तार

 


Report and edited by-Mohammad Sayeed 

AIIPL Trading के नाम पर 50–60% मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों की ठगी, अवैध संपत्तियों पर भी पुलिस का शिकंजा

संतकबीरनगर। निवेश पर 50 से 60 प्रतिशत तक मुनाफा दिलाने का लालच देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ संतकबीरनगर पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। सोमवार को साइबर क्राइम थाना और महुली पुलिस की संयुक्त टीम ने इस बहुचर्चित मामले में दो और वांछित आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार गिरोह ने पोंजी स्कीम जैसी प्रणाली अपनाकर करीब 30 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया और अवैध धन से करोड़ों की संपत्तियां भी अर्जित कीं।

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी धनघटा अभयनाथ मिश्र के पर्यवेक्षण में थाना महुली में दर्ज मुकदमा संख्या 384/2025 की विवेचना के दौरान पुलिस ने वांछित आरोपी विक्रांत प्रकाश सिंह निवासी गायघाट तथा सत्यप्रकाश यादव निवासी चंद्रहर को उनके घरों से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।

51 लाख के निवेश से खुला ठगी का पूरा खेल

मामले की शुरुआत 18 अक्टूबर 2025 को हुई, जब हटवा निवासी संतलाल मौर्य ने शिकायत दर्ज कराई कि विश्वनाथपुर में संचालित TVS Solution और AIIPL Trading के नाम से चल रहे कार्यालय के संचालकों ने शेयर बाजार में भारी मुनाफे का झांसा देकर उनसे लगभग 51 लाख रुपये निवेश कराए। समय पूरा होने के बावजूद न तो लाभ मिला और न ही मूलधन वापस किया गया।

फर्जी मुनाफा दिखाकर बनाई गई 30 करोड़ की पोंजी स्कीम

जांच में पहले गिरफ्तार मुख्य आरोपी धनंजय शुक्ला और रजनी प्रजापति से पूछताछ तथा डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर खुलासा हुआ कि गिरोह निवेशकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फर्जी वर्चुअल बैलेंस और लगातार बढ़ता हुआ लाभ दिखाकर विश्वास में लेता था। वास्तविक निवेश कहीं नहीं किया जाता था, बल्कि नए निवेशकों से मिली रकम से पुराने निवेशकों को भुगतान कर पोंजी स्कीम की तर्ज पर करीब 30 करोड़ रुपये का नेटवर्क खड़ा किया गया।

अवैध कमाई से खरीदी करोड़ों की संपत्तियां

विवेचना में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी विक्रांत प्रकाश सिंह ने इस अवैध कारोबार से लगभग 4 करोड़ रुपये, जबकि सत्यप्रकाश यादव ने करीब 50 लाख रुपये की संपत्ति अर्जित की। इन पैसों से खजनी, सहजनवां और संतकबीरनगर में अचल संपत्तियां खरीदी गईं।

पुलिस ने अपराध से अर्जित धन से लखनऊ में खरीदे गए मकान को जब्त कराने के लिए न्यायालय में रिपोर्ट भेज दी है। साथ ही संबंधित संपत्तियों के क्रय-विक्रय एवं हस्तांतरण पर रोक लगाने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी

पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।

विश्लेषण: यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि अत्यधिक मुनाफे का लालच देकर चलाए जाने वाले निवेश योजनाएं अक्सर धोखाधड़ी का माध्यम बन जाती हैं। पुलिस की कार्रवाई जहां साइबर आर्थिक अपराधों पर सख्ती का संकेत है, वहीं आम लोगों के लिए भी यह सतर्क रहने का महत्वपूर्ण संदेश है कि बिना वैधानिक जांच-पड़ताल के किसी भी निवेश योजना में धन न लगाएं।

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