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नीरजा देवभूमि चैरिटेबल ट्रस्ट की बाल क्राफ्ट प्रदर्शनी में बच्चों की प्रतिभा को मिला मंच, ‘वेस्ट से बेस्ट’ और सामाजिक सरोकारों का दिया संदेश



ऋषिकेश।
बच्चों की रचनात्मक क्षमता को प्रोत्साहित करने और उनमें नवाचार की भावना विकसित करने के उद्देश्य से नीरजा देवभूमि चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा बाल क्राफ्ट प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने अनुपयोगी (वेस्ट) वस्तुओं को उपयोगी एवं आकर्षक कलाकृतियों में बदलकर अपनी सृजनात्मक सोच और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का परिचय दिया। इसके साथ ही बच्चों ने सामाजिक संदेश पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों और अभिभावकों का मन मोह लिया।

प्रदर्शनी में बच्चों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न क्राफ्ट मॉडल, सजावटी सामग्री और उपयोगी वस्तुएं आकर्षण का केंद्र रहीं। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में छिपी प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ-साथ यह संदेश देना था कि बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं का भी रचनात्मक उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया जा सकता है।

इस अवसर पर ट्रस्ट को निरंतर सहयोग प्रदान करने वाले महापौर शंभू पासवान, रमेश, प्रेम सिंह (ओंकार हार्डवेयर) तथा हरिश आनंद का ट्रस्ट परिवार ने सम्मानपूर्वक आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में पार्षद माधवी गुप्ता, कपिल गुप्ता, रितु अग्रवाल, रितु गुप्ता, मनजीत कौर और आरती सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की सफलता में इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थियों दिशा राणा, प्रिंस राज रावत, मुस्कान, वंश चौधरी, वैष्णवी, अनिकेत, वत्सल, नमन, सुजीत, अभिनव, रूपेश, वैभव, ऋषिका, आर्यन एवं आनिध ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं अध्यापिका शिखा पाल, सिलाई प्रशिक्षिकाएं अंजना एवं शालू, तथा कंप्यूटर प्रशिक्षिका लक्ष्मी की सक्रिय सहभागिता भी सराहनीय रही। कार्यक्रम का सफल संचालन सुनील थपलियाल, मनोज एवं सुनीता प्यार ने किया।

कार्यक्रम के समापन पर ट्रस्ट की संस्थापिका नूपुर गोयल एवं संस्थापक डॉ. नीरजा गोयल ने सभी अतिथियों, सहयोगियों, शिक्षकों, इंटर्नशिप विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास केवल पुस्तकीय शिक्षा से संभव नहीं है, बल्कि कला, संस्कृति, रचनात्मक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़े ऐसे आयोजनों से उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को केवल वार्षिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं को वर्षभर ऐसे मंच उपलब्ध कराने चाहिए, जहां बच्चे अपनी कल्पनाशीलता, वैज्ञानिक सोच, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े विचारों को अभिव्यक्त कर सकें। इससे न केवल उनकी प्रतिभा को नई दिशा मिलेगी, बल्कि समाज में सकारात्मक और जागरूक नागरिक तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान होगा।

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