(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। परंपरागत माटीकला उद्योग को बढ़ावा देने और कुम्हार समुदाय को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड एवं जिला ग्रामोद्योग विभाग द्वारा शुक्रवार को विकास खंड खलीलाबाद स्थित पुरानी तहसील परिसर में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न तहसीलों एवं विकास खंडों से आए करीब 140 कारीगरों और स्वरोजगार में रुचि रखने वाले युवाओं ने भाग लिया।
कार्यशाला के दौरान कुम्हारों एवं पारंपरिक माटीकला कारीगरों को विभागीय योजनाओं, आधुनिक तकनीकों और बैंक ऋण की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। साथ ही कारीगरों की समस्याओं को सुनते हुए उनके समाधान का आश्वासन भी दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़कर कारीगरों की आय बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
कार्यक्रम का आयोजन जिला ग्रामोद्योग अधिकारी नीरज कुमार सिंह के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर सूचना अधिकारी सुरेश कुमार सरोज, प्रवक्ता उदयभान चौधरी, सभासद रितेश वर्मा, प्रदीप त्रिपाठी सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
हालांकि, जागरूकता कार्यक्रमों का वास्तविक महत्व तभी साबित होगा, जब कारीगरों को योजनाओं का लाभ बिना अनावश्यक औपचारिकताओं के समय पर मिल सके। आज भी बड़ी संख्या में माटीकला से जुड़े शिल्पकार आसान बैंक ऋण, आधुनिक उपकरण, डिज़ाइन प्रशिक्षण और उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध न होने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। केवल योजनाओं की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करना भी उतना ही आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि माटीकला कारीगरों को डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, आधुनिक डिज़ाइन, ब्रांडिंग और विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो यह पारंपरिक उद्योग न केवल हजारों परिवारों की आजीविका को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


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