खलीलाबाद/संतकबीरनगर। दीपावली और अन्य पर्वों के मद्देनजर अवैध पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए संतकबीरनगर पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में जिले में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत 3 सितंबर से 7 सितंबर 2026 के बीच चार थाना क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए कुल 246 किलो 900 ग्राम अवैध पटाखे बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई थाना कोतवाली खलीलाबाद, दुधारा, महुली और बखिरा क्षेत्र में की गई। बरामदगी की मात्रा को देखते हुए स्पष्ट है कि जिले में अवैध पटाखों के निर्माण और भंडारण के खिलाफ पुलिस ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में निगरानी और कार्रवाई का दायरा बढ़ाया है।
बखिरा में सबसे बड़ी बरामदगी
थाना वार कार्रवाई पर नजर डालें तो सबसे अधिक 114 किलो 800 ग्राम अवैध पटाखे थाना बखिरा क्षेत्र से बरामद किए गए। इसके बाद कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र से 62 किलो 300 ग्राम, महुली थाना क्षेत्र से 56 किलो 200 ग्राम और दुधारा थाना क्षेत्र से 13 किलो 600 ग्राम अवैध पटाखे बरामद किए गए।
| थाना क्षेत्र | बरामद अवैध पटाखे |
|---|---|
| कोतवाली खलीलाबाद | 62 किलो 300 ग्राम |
| दुधारा | 13 किलो 600 ग्राम |
| महुली | 56 किलो 200 ग्राम |
| बखिरा | 114 किलो 800 ग्राम |
| कुल | 246 किलो 900 ग्राम |
आंकड़ों से पता चलता है कि कुल बरामदगी का बड़ा हिस्सा बखिरा थाना क्षेत्र से सामने आया है। हालांकि पुलिस की ओर से जारी जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बरामद पटाखे किन-किन स्थानों से मिले, कितने लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए और बरामदगी के दौरान किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई या नहीं। इन बिंदुओं की जानकारी सामने आने पर कार्रवाई की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
अवैध पटाखों का कारोबार क्यों है गंभीर चुनौती?
पटाखों का निर्माण और भंडारण केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह जनसुरक्षा और अग्नि सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा विषय है। नियमों का उल्लंघन कर पटाखों का निर्माण या बड़ी मात्रा में उनका भंडारण किया जाता है तो आग लगने, विस्फोट और आसपास के लोगों की जान-माल को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
विशेष रूप से आबादी वाले क्षेत्रों में बिना निर्धारित सुरक्षा मानकों के पटाखों का भंडारण गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे स्थानों पर एक छोटी सी चिंगारी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। यही वजह है कि त्योहारों के मौसम में अवैध पटाखों के कारोबार पर प्रशासन और पुलिस की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
सिर्फ बरामदगी नहीं, नेटवर्क तक पहुंचना भी जरूरी
पुलिस की यह कार्रवाई निश्चित रूप से अवैध पटाखों के कारोबार पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अभियान की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात से तय होगी कि बरामदगी के बाद अवैध पटाखों की आपूर्ति और निर्माण के स्रोत तक पुलिस कितनी गहराई से पहुंचती है।
सिर्फ तैयार पटाखों की बरामदगी से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। अवैध निर्माण करने वाले स्थान, कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले लोग, परिवहन व्यवस्था और बिक्री के नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई होने पर ही इस कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। साथ ही लाइसेंसी पटाखा कारोबारियों और अवैध रूप से कारोबार करने वालों के बीच स्पष्ट अंतर करते हुए नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
थाना प्रभारियों को लगातार अभियान चलाने के निर्देश
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया है कि जिले में अवैध पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री के विरुद्ध अभियान को लगातार प्रभावी ढंग से चलाया जाए। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि अभियान का उद्देश्य अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ-साथ आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आने वाले दिनों में अभियान को और गति मिलने की संभावना है।
कार्रवाई का संदेश स्पष्ट
पांच दिनों में करीब 247 किलो अवैध पटाखों की बरामदगी यह संकेत देती है कि पुलिस ने अवैध पटाखा कारोबार को लेकर निगरानी बढ़ाई है। अब चुनौती इस कार्रवाई को केवल बरामदगी तक सीमित न रखकर नियमित जांच, स्रोतों की पहचान और अवैध कारोबार के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई में बदलने की है।
त्योहारों के दौरान पटाखों की मांग बढ़ने के साथ अवैध कारोबार की आशंका भी बढ़ सकती है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन की सतत निगरानी न केवल कानून के पालन के लिए, बल्कि संभावित अग्निकांड और विस्फोट जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिहाज से भी अहम होगी।



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