Report- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh Hindi News Paper
संतकबीरनगर। अपराधों की प्रभावी रोकथाम और लंबित मुकदमों की विवेचनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा कराने के लिए संतकबीरनगर पुलिस ने एक बार फिर विवेचकों की जवाबदेही तय करने की कवायद शुरू की है। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी मेहदावल सर्वदवन सिंह ने थाना मेहदावल में सर्किल के सभी थानों के विवेचकों का अर्दली रूम आयोजित कर लंबित विवेचनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
अर्दली रूम के दौरान विशेष रूप से 60 दिन और 90 दिन की समयसीमा वाली लंबित विवेचनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। सीओ ने संबंधित विवेचकों को ऐसे मामलों का शीघ्र एवं गुणवत्तापरक निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। महिला संबंधी अपराधों में त्वरित कार्रवाई और प्राथमिकता के आधार पर विवेचना पूरी करने पर भी जोर दिया गया।
सिर्फ समयसीमा नहीं, विवेचना की गुणवत्ता भी चुनौती
पुलिस विभाग में लंबित विवेचनाओं का समयबद्ध निस्तारण निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी मामले को केवल समयसीमा के भीतर निस्तारित कर देना ही पर्याप्त है?
किसी भी आपराधिक मामले की विवेचना की वास्तविक गुणवत्ता इस बात से तय होती है कि साक्ष्य कितनी मजबूती से जुटाए गए, गवाहों के बयान कितने निष्पक्ष तरीके से दर्ज हुए, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कितना प्रभावी रहा और अदालत में मामला टिकने की कितनी संभावना है। ऐसे में पुलिस के सामने चुनौती दोहरी है—विवेचना समय पर पूरी हो और उसमें गुणवत्ता से समझौता भी न हो। सीओ ने विवेचकों को इसी दिशा में निष्पक्ष, गुणवत्तापरक और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
महिला अपराधों में त्वरित कार्रवाई पर जोर
बैठक में महिला संबंधी अपराधों की विवेचनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए। महिला और नाबालिगों से जुड़े अपराधों में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई का प्रभाव पीड़ित पक्ष के भरोसे पर सीधे पड़ता है।
ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी ही पुलिस की सफलता का पैमाना नहीं हो सकती। पीड़ित के बयान, मेडिकल साक्ष्य, डिजिटल साक्ष्य, घटनास्थल की जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को भी समय पर पूरा करना जरूरी है। इसलिए महिला अपराधों की विवेचना में गति के साथ संवेदनशीलता और कानूनी मजबूती भी महत्वपूर्ण है।
अपराधियों के सत्यापन के लिए 'यक्ष ऐप' के इस्तेमाल के निर्देश
क्षेत्राधिकारी ने विवेचकों को अपराधों के प्रभावी अनावरण के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण गुडवर्क करने के निर्देश दिए। अपराधियों के सत्यापन के लिए यक्ष ऐप के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को भी कहा गया।
तकनीक आधारित पुलिसिंग का इस्तेमाल अपराधियों की पहचान और सत्यापन में मददगार हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव तभी दिखाई देगा जब तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल जमीनी जांच और ठोस साक्ष्यों के साथ किया जाए।
अर्दली रूम से बढ़ेगी जवाबदेही, अब नतीजों पर नजर जरूरी
पुलिस अधिकारियों द्वारा समय-समय पर विवेचनाओं की समीक्षा किए जाने से विवेचकों की जवाबदेही तय करने में मदद मिलती है। खासकर 60 और 90 दिन से लंबित मामलों की अलग से समीक्षा इस बात का संकेत है कि विभाग पुराने मामलों के बोझ को कम करने पर जोर दे रहा है।
हालांकि, समीक्षा बैठकों की वास्तविक सफलता का आकलन बैठक में दिए गए निर्देशों से नहीं बल्कि उसके बाद सामने आने वाले परिणामों से किया जाना चाहिए। कितनी विवेचनाएं निर्धारित समय में पूरी हुईं, कितने मामलों में आरोपपत्र या अंतिम रिपोर्ट दाखिल हुई, कितने मामलों में साक्ष्यों की कमी रही और कितने मामलों का निस्तारण अदालत में प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सका—इन आंकड़ों से ही पुलिस की कार्रवाई की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल क्षेत्राधिकारी ने विवेचकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी प्रकरण में लापरवाही न बरती जाए और सभी मामलों में निष्पक्ष, गुणवत्तापरक तथा समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि अर्दली रूम में दिए गए निर्देश लंबित विवेचनाओं के वास्तविक निस्तारण और अपराध नियंत्रण में कितनी ठोस प्रगति में बदलते हैं।
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