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गोरखपुर को मिली पहली इलेक्ट्रिक एसी डबल डेकर बस, ट्रायल के बाद तय होगा रूट; किराया रहेगा इलेक्ट्रिक बस के बराबर


(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

गोरखपुर। गोरखपुर परिक्षेत्र के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में एक नई सुविधा जुड़ गई है। पहली इलेक्ट्रिक एसी डबल डेकर बस गोरखपुर पहुंचकर राप्तीनगर स्थित गोरखपुर डिपो में खड़ी कर दी गई है। परिवहन निगम प्रबंधन अब इसके ट्रायल की तैयारी में जुटा है। प्रारंभिक परीक्षण गोरखपुर-कसया मार्ग पर किए जाने की योजना है। ट्रायल के नतीजों के आधार पर बस के नियमित संचालन के लिए रूट निर्धारित किया जाएगा।

इस पहल को केवल नई बस के आगमन के रूप में देखने के बजाय गोरखपुर की बदलती सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है। डबल डेकर बस में अधिक यात्री क्षमता के साथ वातानुकूलित और अपेक्षाकृत आरामदायक सफर की सुविधा मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि यात्रियों पर अतिरिक्त किराये का बोझ न डालते हुए इलेक्ट्रिक बस के बराबर किराया लिए जाने की तैयारी है।

ट्रायल से तय होगी बस की उपयोगिता

डबल डेकर बस को सड़कों पर उतारने से पहले ट्रायल महत्वपूर्ण होगा। गोरखपुर-कसया मार्ग पर परीक्षण के दौरान बस की यात्री क्षमता, सड़क की परिस्थितियों, मोड़, पुल-पुलियों, यातायात दबाव और चार्जिंग संबंधी जरूरतों समेत संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का आकलन किया जा सकता है। सफल परीक्षण के बाद ही नियमित रूट और संचालन की समय-सारिणी पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

क्षेत्रीय प्रबंधक लव कुमार सिंह के मुताबिक, बस गोरखपुर पहुंच चुकी है और परीक्षण की तैयारी चल रही है। ट्रायल सफल होने के बाद इसके संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

पहले से चल रहीं 45 इलेक्ट्रिक बसें

गोरखपुर डिपो से फिलहाल अयोध्या, वाराणसी और सोनौली समेत विभिन्न मार्गों पर 20 इलेक्ट्रिक एसी बसें निर्धारित शेड्यूल के अनुसार संचालित हो रही हैं। इसके अलावा महानगर के अलग-अलग रूटों पर 25 इलेक्ट्रिक बसें भी यात्रियों को सेवा दे रही हैं। ऐसे में नई डबल डेकर बस का आगमन इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन के मौजूदा नेटवर्क को एक अलग स्वरूप देने वाला कदम माना जा रहा है।

150 एसी इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी

नगरीय क्षेत्र के लिए शासन स्तर से 150 सुविधा संपन्न वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी मिलने के बाद आने वाले समय में गोरखपुर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार की संभावना बढ़ी है। हालांकि, केवल बसों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। इनका प्रभावी संचालन, पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, समयबद्ध सेवा, रूट प्लानिंग और रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

पर्यावरण के साथ यात्री सुविधा पर भी नजर

इलेक्ट्रिक बसों का सबसे बड़ा संभावित लाभ डीजल आधारित परिवहन की तुलना में ईंधन खपत और स्थानीय स्तर पर प्रदूषण को कम करना है। वहीं डबल डेकर बस अधिक यात्री क्षमता के कारण व्यस्त मार्गों पर परिवहन क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकती है। यदि इसका संचालन सही रूट और पर्याप्त फ्रीक्वेंसी के साथ किया जाता है, तो निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में भी योगदान मिल सकता है।

फिलहाल असली परीक्षा ट्रायल के बाद शुरू होगी। बस कितनी व्यावहारिक साबित होती है, किस रूट पर सबसे अधिक उपयोगी रहती है और नियमित संचालन में यात्री इसे कितना पसंद करते हैं—इन सवालों के जवाब इसके परीक्षण और संचालन के बाद ही स्पष्ट होंगे। गोरखपुर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में यह पहल निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी सफलता का पैमाना बस का आगमन नहीं, बल्कि उसकी नियमित, सुरक्षित और सुविधाजनक सेवा होगी।

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