खलीलाबाद, संतकबीरनगर। डीघा बाईपास स्थित मिर्ची ढाबा के पास एनएच-27 पर कथित रूप से अनधिकृत बस स्टैंड संचालित किए जाने, सवारी व बड़े वाहनों से अवैध वसूली तथा हाईवे पर वाहनों को खड़ा कर यातायात बाधित करने के आरोप में कोतवाली खलीलाबाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद हाईवे किनारे अनधिकृत रूप से वाहनों के ठहराव और कथित वसूली के नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।
पुलिस के मुताबिक प्रभारी यातायात परमहंस की तहरीर पर कोतवाली खलीलाबाद में मु0अ0सं0 773/2026 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में दयाशंकर विश्वकर्मा पुत्र रामस्वरूप, गोविन्द पुत्र दुर्गा प्रसाद और धर्मेन्द्र मिश्रा पुत्र स्व. रामस्वरूप मिश्रा, निवासी डीघा बाईपास, कोतवाली खलीलाबाद को नामजद किया गया है। इसके अलावा हेमन्त पुत्र अज्ञात, मिर्ची ढाबा संचालक तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी मुकदमे में आरोपी बनाया गया है।
काउंटर लगाकर बस स्टैंड संचालित करने का आरोप
पुलिस की तहरीर के अनुसार, डीघा बाईपास स्थित मिर्ची ढाबा के पास कथित तौर पर काउंटर लगाकर अनधिकृत रूप से बस स्टैंड संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि यहां सवारी वाहनों के अलावा अन्य बड़े वाहनों को भी रोका जाता था और उनसे कथित रूप से वसूली की जाती थी।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि यदि हाईवे पर वाहनों को व्यवस्थित पार्किंग अथवा अधिकृत स्टॉपेज के बिना रोका जा रहा था, तो इससे न केवल यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है बल्कि दुर्घटना की आशंका भी बढ़ सकती है। एनएच-27 जैसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर इस तरह की गतिविधि सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
जाम और यातायात व्यवस्था पर उठे सवाल
पुलिस का आरोप है कि वाहनों के हाईवे पर अनधिकृत रूप से खड़े होने के कारण यातायात प्रभावित हुआ और जाम की स्थिति उत्पन्न हुई। ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि उक्त स्थान पर लंबे समय से वाहन रुक रहे थे तो अनधिकृत स्टैंड की गतिविधियां जिम्मेदार विभागों की निगरानी में पहले क्यों नहीं आईं?
हाईवे पर किसी भी अनधिकृत स्टैंड या वाहन ठहराव को केवल यातायात समस्या के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे यदि संगठित रूप से वसूली अथवा वाहनों को नियंत्रित करने की व्यवस्था संचालित हो रही थी, तो उसकी पूरी श्रृंखला की जांच जरूरी है।
ढाबा संचालक की भूमिका भी जांच के दायरे में
मुकदमे में मिर्ची ढाबा संचालक और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। हालांकि, आरोपों की वास्तविकता और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का निर्धारण पुलिस की जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। किसी व्यक्ति को केवल मुकदमा दर्ज होने के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता।
पुलिस ने मामले में धारा 308(2) एवं 329(3) बीएनएस के तहत अभियोग दर्ज किया है। अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि कथित बस स्टैंड का संचालन कौन कर रहा था, वाहनों से किस आधार पर और किसके निर्देश पर कथित वसूली की जा रही थी तथा हाईवे पर वाहनों को रोकने की व्यवस्था में किन-किन लोगों की भूमिका थी।
कार्रवाई के बाद निगरानी पर भी नजर
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस के सामने अब केवल आरोपियों की भूमिका की जांच करना ही चुनौती नहीं है, बल्कि एनएच-27 पर ऐसे अन्य संभावित अनधिकृत ठहरावों की भी निगरानी जरूरी होगी। यदि किसी स्थान पर अवैध रूप से बस या वाहन स्टैंड संचालित हो रहे हैं, तो उनके खिलाफ प्रभावी और निरंतर कार्रवाई ही यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बना सकती है।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वसूली और अनधिकृत बस स्टैंड संचालन में कौन-कौन लोग वास्तव में शामिल थे और आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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