(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। पुलिस की व्यस्त और चुनौतीपूर्ण ड्यूटी के बीच पढ़ाई के लिए समय निकालना आसान नहीं होता। इसके बावजूद धनघटा थाने में तैनात दो सिपाहियों ने मेहनत, अनुशासन और दोस्ती की ऐसी मिसाल पेश की है, जो पुलिसकर्मियों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है। धनघटा थाने की PRV टीम में तैनात सिपाही अरविंद कुमार मिश्र और उनके मित्र सिपाही गौरव पाण्डेय ने एक साथ Lower PCS परीक्षा में सफलता हासिल की है।
दोनों की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पुलिस की नियमित ड्यूटी, आकस्मिक जिम्मेदारियों और अनियमित समय के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई को जारी रखा और लक्ष्य से भटकने नहीं दिया। एक ही स्थान पर ड्यूटी करने वाले दोनों मित्रों ने साथ-साथ तैयारी की और अब प्रतियोगी परीक्षा में चयन के रूप में अपनी मेहनत का परिणाम हासिल किया है।
एक का सहायक लेखाकार, दूसरे का लेखा परीक्षक पद पर चयन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अरविंद कुमार मिश्र का चयन सहायक लेखाकार के पद पर हुआ है, जबकि उनके परम मित्र गौरव पाण्डेय का चयन लेखा परीक्षक (Auditor) के पद पर हुआ है। दोनों ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की Lower PCS परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।
यह उपलब्धि उनके लिए महज नौकरी में बदलाव नहीं, बल्कि लंबे समय से किए जा रहे प्रयास और आत्मविश्वास की जीत भी है। खाकी वर्दी में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालते हुए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना इस सफलता को और महत्वपूर्ण बनाता है।
ड्यूटी के साथ पढ़ाई का संतुलन बना चुनौती
पुलिसकर्मियों की नौकरी में समय की कोई निश्चितता नहीं होती। कभी दिन की ड्यूटी तो कभी रात की जिम्मेदारी, वीआईपी ड्यूटी, कानून-व्यवस्था की स्थिति और आपात परिस्थितियां नियमित दिनचर्या को प्रभावित करती हैं। ऐसे माहौल में पढ़ाई के लिए निरंतर समय निकालना अपने आप में चुनौती है।
अरविंद और गौरव ने इसी चुनौती को अपनी कमजोरी बनने देने के बजाय अनुशासन का हिस्सा बनाया। दोनों मित्र होने के साथ-साथ एक-दूसरे के सहयोगी भी रहे। पढ़ाई के प्रति उनकी निरंतरता और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता ने अंततः उन्हें सफलता की मंजिल तक पहुंचाया।
दोस्ती बनी सफलता की ताकत
दोनों सिपाहियों की कहानी का सबसे प्रेरक पक्ष उनकी मित्रता है। एक ही PRV टीम में ड्यूटी करने के साथ-साथ दोनों ने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में भी एक-दूसरे का साथ दिया। व्यस्त पुलिस सेवा के बीच पढ़ाई को लेकर एक-दूसरे को प्रेरित करना और लक्ष्य पर केंद्रित रहना उनकी सफलता में अहम भूमिका निभाता रहा।
इससे यह संदेश भी मिलता है कि सही संगत और सकारात्मक मित्रता व्यक्ति को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान अकेले संघर्ष करने के बजाय यदि साथी भी लक्ष्य के प्रति गंभीर हो तो मुश्किल राह कुछ आसान हो सकती है।
पुलिस महकमे में खुशी का माहौल
दोनों सिपाहियों के एक साथ Lower PCS में चयन की खबर मिलते ही धनघटा पुलिस महकमे में खुशी का माहौल बन गया। सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने दोनों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। थाना परिसर में साथियों ने मिठाई खिलाकर उनकी सफलता का जश्न मनाया।
दोनों की उपलब्धि उन पुलिसकर्मियों के लिए भी उत्साहवर्धक है, जो सेवा के साथ उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। यह सफलता बताती है कि सरकारी सेवा की जिम्मेदारियों के बीच भी यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर जारी रहे तो आगे बढ़ने के अवसर बनाए जा सकते हैं।
मेहनत का संदेश बनी दो सिपाहियों की कहानी
अरविंद कुमार मिश्र और गौरव पाण्डेय की सफलता को केवल दो पुलिसकर्मियों के चयन के तौर पर देखना इस उपलब्धि को सीमित कर देना होगा। यह कहानी बताती है कि नौकरी की व्यस्तता, समय का अभाव और कठिन परिस्थितियां लक्ष्य प्राप्ति में बाधा जरूर बन सकती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति रखने वाले व्यक्ति के लिए ये अंतिम रुकावट नहीं होतीं।
दोनों सिपाहियों ने वर्दी की जिम्मेदारी निभाते हुए किताबों से भी अपना रिश्ता बनाए रखा और अंततः Lower PCS में चयन हासिल किया। उनकी कहानी निश्चित रूप से यह संदेश देती है कि मेहनत, अनुशासन, सकारात्मक मित्रता और लक्ष्य के प्रति निरंतरता हो तो परिस्थितियां सफलता की राह को रोक नहीं सकतीं।

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