By- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
संतकबीरनगर। सरकारी शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता को लेकर जिलाधिकारी आलोक कुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि सिर्फ शिकायत बंद कर देना समाधान नहीं माना जाएगा। शिकायतकर्ता निस्तारण के बाद कितना संतुष्ट है, अब इसकी भी विभागवार समीक्षा होगी। जिन विभागों में 50 प्रतिशत से अधिक असंतुष्ट फीडबैक सामने आया है, उनके अधिकारियों को विशेष रूप से सुधार के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्ट्रेट सभागार में शनिवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में IGRS, मुख्यमंत्री संदर्भ और CM Dashboard पर रैंकिंग व प्रगति के आधार पर विकास कार्यों एवं योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में अपर जिलाधिकारी न्यायिक चंद्रेश कुमार सिंह और मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी समेत जनपद स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
शिकायत निस्तारण की असली कसौटी फीडबैक
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री संदर्भ, आयुक्त संदर्भ, जिलाधिकारी संदर्भ, तहसील दिवस और अन्य शिकायतों के लंबित प्रकरणों की विभागवार स्थिति देखी गई। DM ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि IGRS पर प्राप्त संदर्भों का निस्तारण केवल औपचारिकता के रूप में न किया जाए, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और नियमानुसार समाधान सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में मौके पर जाकर जांच की आवश्यकता है तो अधिकारी या संबंधित कर्मचारी स्वयं मौके का निरीक्षण करें। निस्तारण से पहले शिकायतकर्ता का पक्ष जानने और आवश्यकता पड़ने पर उससे संपर्क करने पर भी जोर दिया गया।
50% से अधिक असंतुष्ट फीडबैक पर विशेष निगरानी
बैठक का महत्वपूर्ण बिंदु शिकायतों के निस्तारण के बाद मिलने वाला फीडबैक रहा। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि बड़ी संख्या में शिकायतकर्ता असंतुष्ट हैं तो यह संकेत है कि निस्तारण की प्रक्रिया में कहीं न कहीं कमी रह गई है।
जिन विभागों से संबंधित मामलों में असंतुष्ट फीडबैक 50 प्रतिशत से अधिक है, उन अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया। अब ऐसे मामलों में केवल निस्तारण रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि असंतुष्टि के कारणों की भी पड़ताल करनी होगी।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि आगामी बैठकों में असंतुष्ट फीडबैक वाले मामलों की पूरी रिपोर्ट के साथ उपस्थित हों।
CM Dashboard की रैंकिंग पर भी फोकस
बैठक में CM Dashboard पर प्रदर्शित फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स और विभिन्न विकास योजनाओं की विभागवार प्रगति की आंकड़ों के आधार पर समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने लक्ष्य के सापेक्ष धीमी प्रगति वाले विभागों को गति बढ़ाने और योजनाओं तथा निर्माण कार्यों में गुणात्मक प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
DM ने अधिकारियों से कहा कि अपने-अपने विभाग की योजनाओं की लगातार समीक्षा करते रहें, ताकि किसी स्तर पर कमी सामने आने पर समय रहते सुधार किया जा सके और कोई पात्र व्यक्ति सरकारी योजना के लाभ से वंचित न रह जाए।
रैंकिंग से आगे, जमीनी परिणाम की चुनौती
बैठक में CM Dashboard पर जिले की रैंकिंग बेहतर रखने पर जोर दिया गया, लेकिन निर्देशों में शिकायतकर्ता के फीडबैक और योजनाओं की वास्तविक प्रगति को भी महत्व दिया गया है। ऐसे में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ पोर्टल और डैशबोर्ड पर बेहतर प्रदर्शन, दूसरी तरफ जमीन पर शिकायतकर्ता और लाभार्थी की संतुष्टि।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि असंतुष्ट फीडबैक वाले मामलों की समीक्षा के बाद विभागों की कार्यप्रणाली में कितना वास्तविक सुधार आता है और CM Dashboard की बेहतर रैंकिंग का असर आम लोगों तक पहुंचने वाली सेवाओं में कितना दिखाई देता है।
बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामानुज कनौजिया, प्रभागीय वनाधिकारी हरिकेश यादव, जिला विकास अधिकारी रुक्मणी वर्मा, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार प्रभात द्विवेदी, परियोजना निदेशक विजयंत सिंह समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
यह खबर संतकबीरनगर सूचना कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस-विज्ञप्ति के आधार पर संपादित की गई है।

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