Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor
संतकबीरनगर। धान की कटाई और रबी सीजन की बुवाई के बीच जनपद में उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। बारिश के कारण धान की कटाई प्रभावित होने और रबी फसलों की बुवाई शुरू होने के बीच आगामी दिनों में डीएपी सहित फास्फेटिक उर्वरकों की मांग बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को विकास भवन में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार यादव ने बताया कि जनपद में अब तक किसानों के बीच लगभग 3100 मीट्रिक टन डीएपी का वितरण किया जा चुका है। इसके बावजूद स्टॉक में 4561 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि सहकारिता क्षेत्र में सचिवों की हड़ताल के चलते कुछ स्थानों पर उर्वरक वितरण प्रभावित हुआ है। ऐसे में किसानों को खाद की उपलब्धता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक वितरण व्यवस्था तैयार की गई है।
पीसीएफ गोदाम में डीएपी, एनपीके और टीएसपी का भंडार
बैठक में उपलब्ध भंडार का विवरण देते हुए बताया गया कि जनपद के पीसीएफ बफर गोदाम में पीसीएफ खाते के अंतर्गत 426.150 मीट्रिक टन डीएपी, 637 मीट्रिक टन एनपीके और 343 मीट्रिक टन टीएसपी उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त कृभको के सामान्य खाते में 900 मीट्रिक टन डीएपी भंडारित है।
प्रशासन के अनुसार बारिश के कारण खेती का काम प्रभावित हुआ है। मौसम अनुकूल होने पर किसानों द्वारा एक साथ बुवाई शुरू किए जाने की संभावना है। इससे आगामी सप्ताह में डीएपी की मांग अचानक बढ़ सकती है। इसी संभावित स्थिति को देखते हुए पहले से वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाने पर जोर दिया गया।
सहकारी समितियों के विकल्प के रूप में दूसरे बिक्री केंद्रों से वितरण
सहकारिता क्षेत्र में सचिवों की हड़ताल के कारण खाद वितरण में आ रही बाधा को देखते हुए जिला स्तरीय उर्वरक समिति ने वैकल्पिक व्यवस्था का निर्णय लिया है। इसके तहत जनपद में संचालित इफको के अन्य बिक्री केंद्रों के माध्यम से भी किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
इनमें पीसीएफ केंद्र, एग्रीजंक्शन, आईएफएफडीसी, डीसीएफ और इफको बाजार केंद्र शामिल हैं। समिति के निर्णय के अनुसार इन बिक्री केंद्रों को डीएपी, एनपीके और टीएसपी का केंद्रवार आवंटन किया गया है, ताकि सहकारी समितियों पर निर्भरता कम होने के साथ किसानों को उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
उर्वरक उपलब्धता के दावे और जमीनी वितरण के बीच तालमेल जरूरी
जनपद में डीएपी का उपलब्ध भंडार और वैकल्पिक बिक्री केंद्रों के माध्यम से वितरण की व्यवस्था किसानों के लिए राहत देने वाली पहल हो सकती है। लेकिन केवल गोदामों में खाद की उपलब्धता का आंकड़ा पर्याप्त नहीं है। किसानों को समय पर, निर्धारित दर पर और आसानी से उर्वरक मिलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
सहकारिता क्षेत्र में हड़ताल के चलते वितरण प्रभावित होने की बात स्वयं बैठक में सामने आई है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती केवल खाद का आवंटन करने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि वैकल्पिक केंद्रों पर पर्याप्त स्टॉक पहुंचे और किसानों को अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।
अब देखना होगा कि आगामी सप्ताह में डीएपी की संभावित बढ़ती मांग के बीच यह वैकल्पिक व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है और किसानों को वास्तव में कितनी सुगमता से खाद उपलब्ध हो पाती है।
बैठक में एआर कॉपरेटिव आनंद मिश्रा, डीएस पीसीएफ अखिलेश, इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक आशीष सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
मिशन संदेश | संतकबीरनगर
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