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मिशन संदेश | मोहम्मद सईद पठान द्वारा रिपोर्ट
संतकबीरनगर, । दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उनकी दैनिक गतिविधियों को आसान बनाने के उद्देश्य से ब्लॉक संसाधन केंद्र हैसर बाजार में उपकरण वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 65 दिव्यांग बच्चों को विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए। हालांकि, ऐसे आयोजनों की वास्तविक सफलता केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चों को आगे नियमित शैक्षिक सहयोग और जरूरी सुविधाएं मिलती रहें।
जिलाधिकारी के निर्देश और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विजय बहादुर सिंह, खंड विकास अधिकारी, चिकित्सा विभाग के प्रतिनिधि तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह सहित संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
उपकरणों से आसान होगी पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी
मुख्य अतिथि विजय बहादुर सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में कुल 65 बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण वितरित किए गए। इनमें ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, सीपी चेयर, बैसाखी, ब्रेल एवं अन्य शैक्षिक सहायता सामग्री तथा श्रवण यंत्र शामिल रहे। इन उपकरणों से बच्चों को आवागमन, दैनिक कार्यों और पढ़ाई में सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने कहा कि खराब मौसम के बावजूद अभिभावकों की उपस्थिति दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है। उन्होंने आश्वस्त किया कि बच्चों की आवश्यकताओं के अनुरूप विभागीय स्तर से उपलब्ध सुविधाएं दिलाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने ब्रेल लिपि के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उचित संसाधन और अवसर मिलने पर दिव्यांग बच्चे भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं।
प्रमाणपत्र और योजनाओं का लाभ पाने पर जोर
चिकित्सा विभाग के प्रतिनिधि ने अभिभावकों से दिव्यांग बच्चों का आवश्यक चिकित्सीय परीक्षण और प्रमाणपत्र बनवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विभाग बच्चों के परीक्षण में सहयोग करेगा, जबकि शिक्षा विभाग के माध्यम से पढ़ाई और आवश्यक समन्वय की सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में दिए गए वक्तव्य में यह भी बताया गया कि दिव्यांगजनों के लिए छात्रवृत्ति, पेंशन सहित कई सरकारी योजनाओं का लाभ पात्रता और निर्धारित प्रमाणपत्रों के आधार पर मिलता है। इसलिए अभिभावकों को अपने गांव और संबंधित विभागों के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
नवंबर में तहसील स्तर पर प्रमाणपत्र शिविर की तैयारी
जिला समन्वयक शिक्षा डॉ. रजनीश वैद्यनाथ ने बताया कि जनपद के प्रत्येक ब्लॉक में दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाने के लिए शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। जो बच्चे इन शिविरों में छूट गए हैं, उनके लिए पीएम श्री योजना के अंतर्गत नवंबर माह में तहसील स्तर पर प्रमाणपत्र जारी करने के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। चिकित्सा विभाग के सहयोग से श्रवण बाधित बच्चों की ऑडियोमेट्री जांच कराने का भी प्रयास किया जा रहा है, ताकि उन्हें जरूरत के अनुसार सहायता मिल सके।
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| कार्यक्रम में उपस्थित दिव्यांगजन परिवार के लोग |
सिर्फ वितरण नहीं, निरंतर निगरानी भी जरूरी
हैसर बाजार में 65 बच्चों को उपकरण उपलब्ध कराना निश्चित रूप से उपयोगी पहल है, लेकिन इसके साथ कुछ महत्वपूर्ण सवाल भी जुड़े हैं। क्या सभी बच्चों को उनकी वास्तविक जरूरत के अनुसार उपकरण मिले? क्या उपकरणों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया? क्या स्कूलों में उनके लिए अनुकूल वातावरण, विशेष शिक्षकों का सहयोग और नियमित शैक्षिक मूल्यांकन सुनिश्चित है?
दिव्यांग बच्चों को सशक्त बनाने के लिए उपकरण वितरण के बाद भी विभागीय निगरानी और अभिभावकों से संवाद जरूरी है। प्रमाणपत्र, छात्रवृत्ति, पेंशन, सहायक उपकरण और समावेशी शिक्षा की सुविधाएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं। इन सभी का लाभ समय पर और बिना अनावश्यक दौड़भाग के मिलना ही ऐसी योजनाओं की सार्थकता तय करेगा।
कार्यक्रम का संचालन जिला समन्वयक शिक्षा डॉ. रजनीश वैद्यनाथ ने किया। इस अवसर पर स्पेशल एजुकेटर दिलीप यादव, मोना गौतम, शंभू प्रसाद, दुर्गेश यादव, वीरेंद्र कुमार चौधरी सहित रोहित कुमार, जुबेर अहमद, दिग्विजय पांडेय और अन्य लोग उपस्थित रहे।
मिशन संदेश का सवाल: क्या उपकरण पाने वाले सभी 65 बच्चों की जरूरतों का आगे भी नियमित आकलन किया जाएगा, ताकि सहायता केवल एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित न रह जाए?



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