उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 2000 करोड़ के निवेश का लक्ष्य, लंबित आवेदनों और औद्योगिक सुविधाओं पर सीडीओ ने दिए निर्देश
मिशन संदेश | मोहम्मद सईद पठान द्वारा रिपोर्ट
संतकबीरनगर । जिले में औद्योगिक निवेश को गति देने, स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने और उद्यमियों की समस्याओं के समाधान को लेकर मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में जिला उद्योग बन्धु समिति एवं स्वरोजगारपरक योजनाओं की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित प्रकरणों से लेकर बैंक में अटके ऋण आवेदनों, औद्योगिक क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं और प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क तक के मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक में नवंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी-5.0) के लिए जनपद को 2,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य मिलने की जानकारी दी गई। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए संबंधित विभागों को अधिक से अधिक एमओयू हस्ताक्षरित कराने के निर्देश दिए गए। हालांकि, निवेश का लक्ष्य तय होना और वास्तविक औद्योगिक इकाइयों का जमीन पर स्थापित होना दो अलग-अलग चरण हैं। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित निवेश में से कितनी परियोजनाएं वास्तव में धरातल पर उतर पाती हैं।
बैंक में लंबित आवेदन और स्वरोजगार योजनाओं की चुनौती
बैठक में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) वित्तपोषण योजना तथा एक जनपद एक व्यंजन वित्तपोषण योजना की समीक्षा की गई।
मुख्य विकास अधिकारी ने अग्रणी जिला प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक और उपायुक्त उद्योग को योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने, निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध पूरा कराने तथा बैंकों में लंबित आवेदन पत्रों का नियमित फॉलोअप करने के निर्देश दिए। शाखा स्तर पर लंबित ऋण स्वीकृति और वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने को भी कहा गया।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वरोजगार योजनाओं का लाभ केवल आवेदन और स्वीकृति तक सीमित नहीं रहना चाहिए। युवाओं को समय पर ऋण उपलब्ध होना, कारोबार शुरू करने में सहयोग मिलना और उद्यम के संचालन में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। बैठक में लंबित आवेदनों की संख्या और उनके निस्तारण की समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई, ऐसे में इन योजनाओं की वास्तविक प्रगति का आकलन आगे की रिपोर्टिंग से ही संभव होगा।
औद्योगिक क्षेत्र खलीलाबाद और मगहर टेक्सटाइल पार्क पर चर्चा
बैठक में औद्योगिक क्षेत्र खलीलाबाद के विस्तार, खाली एवं बंद पड़े भूखंडों तथा भूखंडों के अवैध हस्तांतरण से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपी सीडा गोरखपुर ने समिति को संबंधित बिंदुओं पर अद्यतन जानकारी दी।
मगहर कताई मिल परिसर में प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क और होजरी से जुड़े विषयों पर सहायक आयुक्त हथकरघा ने प्रगति से अवगत कराया। वहीं डीघा बाईपास ओवरब्रिज से औद्योगिक क्षेत्र तक लिंक रोड निर्माण के लिए एनएचएआई के प्रतिनिधि को शीघ्र सर्वे कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
इन परियोजनाओं का महत्व स्थानीय रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ा है। विशेषकर मगहर स्थित कताई मिल परिसर के उपयोग और टेक्सटाइल पार्क की दिशा में ठोस प्रगति से जिले में रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं। लेकिन इसके लिए प्रस्तावों को समयबद्ध कार्ययोजना, भूमि संबंधी स्पष्टता और आधारभूत सुविधाओं से जोड़ना आवश्यक होगा।
उद्यमियों की समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं पर भी निर्देश
बैठक में मोहन एंड ज्ञानेश्वर ऑयल मिल, केसरी लॉन एवं रिजॉर्ट, यूनिक ट्रेडर्स तथा प्लेज पार्क योजना से जुड़े आवेदनों पर चर्चा हुई। प्लेज पार्क के संबंध में संबंधित विभागों की आख्या मिलने के बाद संयुक्त स्थलीय सर्वेक्षण की तिथि निर्धारित किए जाने की बात कही गई।
इसके अतिरिक्त औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था, ईएसआईसी डिस्पेंसरी, औद्योगिक आस्थान के नालों की सफाई, अनुरक्षण शुल्क और संपत्ति कर जैसे मुद्दों की समीक्षा की गई। संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
लक्ष्य से आगे बढ़कर परिणाम पर भी होनी चाहिए निगरानी
जिले में 2,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य, स्वरोजगार योजनाओं का विस्तार, खलीलाबाद औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं का समाधान और मगहर में टेक्सटाइल पार्क की संभावनाएं विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। लेकिन इन सभी प्रयासों की सफलता का आकलन केवल बैठकों और निर्देशों से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों से होगा।
कितने एमओयू वास्तविक निवेश में बदलेंगे? कितने युवाओं को बैंक से ऋण मिलेगा? कितनी औद्योगिक इकाइयां शुरू होंगी और कितने स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा? औद्योगिक क्षेत्र की सड़क, जलनिकासी और अन्य सुविधाओं की समस्याएं कब तक दूर होंगी? ये वे सवाल हैं जिनके जवाब आने वाले महीनों में प्रशासनिक कार्यवाही की वास्तविक तस्वीर सामने लाएंगे।
मिशन संदेश का सवाल: क्या नवंबर में प्रस्तावित जीबीसी-5.0 के बाद जिले के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की समयबद्ध कार्ययोजना और उसकी सार्वजनिक प्रगति रिपोर्ट भी सामने आएगी?
बैठक में उपायुक्त उद्योग विनोद कुमार वर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी और उद्यमी उपस्थित रहे।

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