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NRC, NPR के बाद अब नेशनल बिजनस रजिस्टर पर मोदी सरकार कर रही है विचार


नई दिल्ली ।
सरकार एक नैशनल स्टैटिस्टिकल बिजनस रजिस्टर तैयार करने की योजना बना रही है। मामले से वाकिफ अधिकारियों ने बताया कि सातवें इकनॉमिक सेंसस के नतीजों के आधार पर इसमें देश की सभी बिजनस एंटरप्राइजेज की जानकारी जुटाई जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि रजिस्टर में गुड्स और सर्विसेज के प्रॉडक्शन और डिस्ट्रिब्यूशन से जुड़ी कंपनियों को शामिल किया जाएगा। इन्हें जिले के आधार पर बांटा जाएगा। गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST) नेटवर्क, एंप्लॉयीज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन, एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय से मिलने वाले आधिकारिक आंकड़ों के जरिए इस सूची को लगातार अपडेट किया जाएगा।


मामले से वाकिफ एक अधिकारी ने बताया, 'सेंसस से इस रजिस्टर का फ्रेमवर्क तैयार करने में मदद मिलेगी। GSTN जैसे सरकारी विभागों के डेटा के जरिए इसे लगातार अपडेट किया जा सकेगा।'



सुझाव तैयार
सरकार को उम्मीद है कि जुटाए गए आंकड़ों से देश की आर्थिक गतिविधियों का बेहतर हिसाब रखने में मदद मिलेगी। साथ ही सर्विसेज के प्रस्तावित सालाना सर्वे के लिए सुझाव तैयार किए जा सकेंगे। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स ऐंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन (MoSPI) रजिस्टर के जरिए कंपनियों के डेटा को डिजिटल रूप देना चाहती है। इसमें एंटरप्राइज का नाम, पता, वह क्या करती है, कौन मालिक है, कितने वर्कर काम करते हैं और PAN/TAN जैसी जानकारियां शामिल होंगी।



मिनिस्ट्री ने वित्त मंत्रालय से पहले ही GST से जुड़े डेटा शेयर करने को कहा था। नैशनल अकाउंट्स को मजबूत बनाने के लिए उसने तिमाही आधार पर हुए टैक्स कलेक्शन और टैक्स भरने वाली यूनिट्स आदि की जानकारी मांगी थी। सरकार को यह भी उम्मीद है कि डेटा के जरिए प्रस्तावित 'सर्वे ऑफ सर्विसेज' में सेक्टर का अधिक कवरेज करने में मदद मिलेगी। देश के पहले चीफ स्टैटिस्टिशन रहे प्रणब सेन का अनुमान है कि प्रस्तावित सर्वे में दो स्रोतों का सहारा लिया जाएगा - GSTN डेटा और बिजनस रजिस्टर।


कई राज्यों ने अपने बिजनस रजिस्टर तैयार करने शुरू कर दिए हैं। उदाहरण के तौर पर, राजस्थान ने सभी यूनिटों को मिलाकर यूनीक बिजनस रजिस्ट्रेशन नंबर वाला रजिस्टर बनाया है। सेन के अनुसार, हर तीन साल पर सेंसस कराने का सरकारी सुझाव सही नहीं है। यह प्रक्रिया खर्चीली होती है। इसके लिए भारी संख्या में लोगों की तैनाती करनी पड़ती है। उन्होंने कहा, 'स्कूल टीचर्स को सर्वे करने की अनुमति नहीं मिलने के कारण राज्यों में सरकारी अधिकारियों को यह जिम्मा उठाना पड़ता है। यह चुनौतीपूर्ण काम है।'


ऐनुअल टर्नओवर
जिन कंपनियों का ऐनुअल टर्नओवर 40 लाख रुपये से अधिक का है, उन्हें खुद को GSTN के तहत रजिस्टर कराना होता है। पूर्वोत्तर और जम्मू और कश्मीर के लिए यह सीमा 20 लाख रुपये है। सेन ने बताया, 'सर्विसेज का डेटा लगातार बदलता रहता है, जिस करण यह ऐनुअल सर्वे ऑफ इंडस्ट्रीज से अलग होगा। इन दोनों डेटाबेस को मिलाकर GDP का अनुमान लगाया जाएगा।' उन्होंने कहा कि नाम, पता, बिजनस का प्रकार जैसी जानकारियां GSTN से हासिल की जा सकती हैं।


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