संतकबीरनगर। जनपद पुलिस के “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के तहत प्रभावी विवेचना और सशक्त पैरवी का एक और सकारात्मक परिणाम सामने आया है। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) न्यायालय ने किशोरी को बहला-फुसलाकर भगाने के मामले में दोषी पाए गए एक अभियुक्त को पांच वर्ष के सश्रम कारावास तथा 5,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में प्रभावी ढंग से साक्ष्य प्रस्तुत किए। इसके आधार पर न्यायालय ने थाना महुली क्षेत्र निवासी सोनू पुत्र यदुवंश को दोषसिद्ध कर सजा सुनाई।
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2018 में पीड़िता के पिता ने थाना महुली में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग पुत्री को आरोपी बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366 तथा पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान तत्कालीन विवेचक ने साक्ष्य एकत्र कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने आरोपी को धारा 363 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 2,000 रुपये जुर्माना, जबकि धारा 366 के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास एवं 3,000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया है।
समीक्षात्मक दृष्टि से यह फैसला महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों में त्वरित एवं प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। लंबे समय तक लंबित रहने वाले मामलों में दोषसिद्धि केवल पुलिस की विवेचना ही नहीं, बल्कि अभियोजन की प्रभावी पैरवी और न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती को भी दर्शाती है। हालांकि, ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती अपराध की रोकथाम है। इसके लिए कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ परिवारों, विद्यालयों और समाज में जागरूकता बढ़ाने तथा बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील वातावरण तैयार करना भी उतना ही आवश्यक है। “ऑपरेशन कन्विक्शन” जैसे अभियान तभी अधिक प्रभावी साबित होंगे, जब विवेचना की गुणवत्ता, समयबद्ध सुनवाई और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया निरंतर मजबूत होती रहे।

Post a Comment