(Report Mohammad Sayeed Pathan journalist)
संतकबीरनगर। प्रदेश सरकार द्वारा आमजन को त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित यूपी-112 आपातकालीन सेवा की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। संतकबीरनगर में सामने आए एक मामले ने इस सेवा की विश्वसनीयता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
जानकारी के अनुसार, 27 जुलाई सोमवार रात करीब 10 बजे एक व्यक्ति ने आपात स्थिति में यूपी-112 पर कॉल कर पुलिस सहायता मांगी। कॉल दर्ज होने के बाद शिकायतकर्ता को मैसेज प्राप्त हुआ और कॉल सेंटर से भी संपर्क किया गया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि बुधवार तक भी संबंधित पीआरवी निर्धारित स्थान पर नहीं पहुंच सकी।
और भी गंभीर पहलू यह है कि मंगलवार 28 जुलाई शाम यूपी-112 मुख्यालय से शिकायतकर्ता को फोन कर पूछा गया कि क्या वह समस्या के समाधान से संतुष्ट है। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट रूप से बताया कि "पीआरवी अब तक मौके पर पहुंची ही नहीं।" इसके बाद केवल औपचारिक रूप से क्षमा मांग ली गई, लेकिन मौके पर पुलिस सहायता फिर भी नहीं पहुंची।
यह घटना कई अहम सवाल खड़े करती है। यदि आपातकालीन सेवा ही समय पर घटनास्थल तक नहीं पहुंचेगी तो आम नागरिक संकट की घड़ी में किस पर भरोसा करेगा? क्या कॉल रिसीव कर लेना और फीडबैक लेना ही सेवा का उद्देश्य रह गया है? क्या संबंधित पीआरवी की जवाबदेही तय की जाएगी? क्या इस मामले की विभागीय जांच होगी और लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर कार्रवाई होगी?
यूपी-112 को सरकार ने जनता की सुरक्षा का सबसे तेज और भरोसेमंद माध्यम बताया है। ऐसे में यदि गंभीर शिकायतों पर भी त्वरित कार्रवाई नहीं होती, तो यह न केवल व्यवस्था की कार्यकुशलता पर प्रश्न उठाता है, बल्कि आमजन के विश्वास को भी कमजोर करता है। अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करें, ताकि आपातकालीन सेवा पर जनता का भरोसा कायम रह सके।

Post a Comment