- स्वतंत्रता दिवस समारोह में 200 से अधिक दिव्यांगजन और अभिभावकों ने लिया हिस्सा, सीआरसी निदेशक ने अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति किया जागरूक
(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
गोरखपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सीआरसी की ओर से आयोजित समारोह में दिव्यांगजनों ने अपनी प्रतिभा और उत्साह से माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। देशभक्ति गीतों की धुन पर दिव्यांगजन जमकर थिरके और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की भावना को अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम में 200 से अधिक दिव्यांगजन एवं उनके अभिभावक मौजूद रहे।
दिव्यांग प्रतिभागियों की प्रस्तुतियां इस मायने में खास रहीं कि भाषा-वाणी अथवा बौद्धिक समझ से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने जिस आत्मविश्वास और उत्साह के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया, वह उपस्थित लोगों के लिए प्रेरणादायी रहा। उनकी प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि उचित अवसर, सहयोग और प्रोत्साहन मिलने पर दिव्यांगजन अपनी क्षमताओं को प्रभावी ढंग से सामने ला सकते हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीआरसी निदेशक जितेंद्र यादव ने सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल देश की आजादी का पर्व नहीं, बल्कि नागरिकों को अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक होने और देशहित में अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने की प्रेरणा देने वाला अवसर भी है।
उन्होंने विशेष रूप से दिव्यांगता पुनर्वास के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यदि पुनर्वास सेवाओं से जुड़े लोग दिव्यांगजनों के प्रति पूर्ण समर्पण, संवेदनशीलता और कौशल के साथ कार्य करें, तो यही उनके लिए वास्तविक स्वतंत्रता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि समान अवसर, सम्मान, आत्मनिर्भरता और समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी का अधिकार मिलना चाहिए।
इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक राजेश कुमार तथा प्रवक्ता भौतिक चिकित्सा डॉ. विजय गुप्ता ने भी उपस्थित दिव्यांगजनों और अभिभावकों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का संचालन राजेश कुमार यादव और अरविंद कुमार पांडे ने किया। वहीं संध्या सिंह और नागेंद्र पांडे ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
संवेदनशीलता और अवसर से बदल सकती है तस्वीर
समारोह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां महज मनोरंजन तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने दिव्यांगजनों की क्षमताओं को समझने और उन्हें समान अवसर देने की जरूरत को भी रेखांकित किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम इस संदेश के साथ महत्वपूर्ण रहा कि किसी व्यक्ति की शारीरिक, भाषायी या बौद्धिक सीमाएं उसकी प्रतिभा और राष्ट्र के प्रति उसकी भावनाओं को सीमित नहीं करतीं। आवश्यकता इस बात की है कि समाज उन्हें सम्मानजनक अवसर और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराए।

Post a Comment