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राम मंदिर दानपात्र विवाद में चंपत राय का नया दावा, 6 फरवरी 2025 के दस्तावेज से किया खुद को अलग


पूर्व महासचिव बोले— जिस गाइडलाइन का दिया जा रहा 

हवाला, उससे मेरा कोई संबंध नहीं; 

दस्तावेज पर नहीं हैं मेरे 

हस्ताक्षर

News Source Newstraik 

(News Edit By-Mohammad Sayeed Pathan)

अयोध्या। राम मंदिर दानपात्र से जुड़े विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने एक पत्र जारी कर पूरे प्रकरण में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने दान की गणना (काउंटिंग) प्रक्रिया से संबंधित 6 फरवरी 2025 के एक दस्तावेज से स्वयं को पूरी तरह अलग बताते हुए कहा कि न तो उस पर उनके हस्ताक्षर हैं और न ही उन्होंने उसे कभी स्वीकृति दी थी।

चंपत राय ने अपने पत्र में कहा कि जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में 6 फरवरी 2025 का एक दस्तावेज मौजूद है, जिसमें मंदिर में प्राप्त दान की गणना की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। उनके अनुसार, इस दस्तावेज पर ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या शाखा के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्र के हस्ताक्षर हैं।

https://x.com/ChampatRaiVHP/status/2074466087694188800


उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और उन्होंने कभी भी उसे अपनी मंजूरी नहीं दी। ऐसे में उस दस्तावेज या उसमें वर्णित प्रक्रिया को उनके साथ जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस गाइडलाइन का हवाला देकर उनके नाम का उल्लेख किया जा रहा है, उससे उनका कोई लेना-देना नहीं है और वह उसे पूरी तरह अस्वीकार करते हैं।

राम मंदिर दानपात्र से जुड़े विवाद के बीच चंपत राय का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दान की गणना और प्रबंधन की प्रक्रिया को लेकर पहले से कई तरह के सवाल उठते रहे हैं। ऐसे समय में उनका सार्वजनिक रूप से इस दस्तावेज से दूरी बनाना मामले को नया आयाम दे सकता है।

हमारी समीक्षा

चंपत राय का यह पत्र संकेत देता है कि दानपात्र प्रबंधन से जुड़े निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर ट्रस्ट के भीतर जिम्मेदारियों और अधिकारों के सवाल भी चर्चा का विषय बन सकते हैं। हालांकि, किसी भी दस्तावेज की वैधता, उसकी स्वीकृति और उससे जुड़ी जवाबदेही का अंतिम निर्धारण जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

फिलहाल, चंपत राय के इस बयान ने विवाद में एक नया पक्ष जोड़ दिया है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट, ट्रस्ट की आधिकारिक प्रतिक्रिया और अन्य संबंधित पक्षों के बयान इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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