सद्बुद्धि यज्ञ कर शुरू किया जनजागरण
अभियान, तीन सूत्रीय मांगपत्र जारी
(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
अयोध्या। श्रीराम मंदिर में कथित चंदा एवं चढ़ावे से जुड़े विवाद को लेकर समाजवादी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन कर जनजागरण अभियान शुरू किया। अभियान के तहत कार्यकर्ताओं ने पर्चे वितरित कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई और सरकार से तीन प्रमुख मांगों पर कार्रवाई करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम का नेतृत्व करने वाले ठाकुर सौरभ सिंह, विधानसभा कल्यानपुर-211 ने कहा कि मीडिया में प्रकाशित खबरों और विभिन्न रिपोर्टों के आधार पर श्रीराम मंदिर में चंदा एवं चढ़ावे से जुड़े मामलों पर कई सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना था कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
समाजवादी कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव और मोहल्लों में जनजागरण अभियान चलाने की घोषणा करते हुए कहा कि पर्चों के माध्यम से लोगों को मीडिया में प्रकाशित सूचनाओं और मामले से जुड़े प्रश्नों से अवगत कराया जाएगा।
कार्यकर्ताओं ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली, पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। दूसरी, मंदिर निर्माण और ट्रस्ट द्वारा भूमि क्रय-विक्रय से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की भी जांच कराई जाए। तीसरी, वर्तमान मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन पर विचार करते हुए उसमें प्रमुख हिंदू धर्माचार्यों, जिनमें चारों शंकराचार्यों का प्रतिनिधित्व भी शामिल हो, को स्थान दिया जाए।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जांच प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि लोगों के मन में उठ रहे सवालों का समाधान हो सके।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित सरकारी एजेंसियों और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से समय-समय पर अपना पक्ष भी रखा जाता रहा है। मामले से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जांच और कानूनी प्रक्रिया अपने स्तर पर जारी है।
समीक्षा: धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में लगाए जाने वाले आरोप अत्यंत संवेदनशील होते हैं। ऐसे मामलों में राजनीतिक बयानबाजी के बजाय निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना आवश्यक है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट और न्यायालय की प्रक्रिया का इंतजार करना ही लोकतांत्रिक और संवैधानिक दृष्टि से उचित माना जाता है।

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