(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत ने जनपद भ्रमण के दौरान विकासखंड खलीलाबाद स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय (राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय), चकदही का निरीक्षण कर शिक्षा व्यवस्था, छात्रावास, रसोई और विद्यालय परिसर का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने साफ-सफाई और पठन-पाठन की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। हालांकि, निरीक्षण के दौरान सामने आए कुछ आंकड़े शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई अहम सवाल भी छोड़ गए।
निरीक्षण के समय विद्यालय की प्रभारी प्रधानाचार्या अलका राय मौजूद रहीं। आयोग अध्यक्ष ने कक्षा 6, 7 तथा इंटरमीडिएट की रसायन विज्ञान प्रयोगशाला का निरीक्षण किया और छात्राओं से शिक्षा व्यवस्था की जानकारी ली। छात्रावास, रसोई और भोजन व्यवस्था का भी अवलोकन किया गया। अधिकारियों के अनुसार, निर्धारित मेन्यू के अनुरूप भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई।
विद्यालय में कुल 14 शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। वहीं विद्यालय की 480 छात्राओं की क्षमता के मुकाबले निरीक्षण के समय केवल 238 छात्राएं ही उपस्थित थीं। यह आंकड़ा क्षमता के लगभग आधे तक ही सीमित उपस्थिति को दर्शाता है, जो विद्यालय में नामांकन, नियमित उपस्थिति या अन्य व्यवस्थागत चुनौतियों की ओर संकेत करता है।
सिर्फ निरीक्षण नहीं, समाधान भी जरूरी
निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई और पठन-पाठन की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया गया, लेकिन शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आवासीय विद्यालय की गुणवत्ता का आकलन केवल भवन, रसोई और प्रयोगशाला देखकर नहीं किया जा सकता। वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होगा कि छात्राओं की नियमित उपस्थिति, परीक्षा परिणाम, शिक्षण की गुणवत्ता और छात्राओं की समग्र प्रगति कैसी है।
सबसे बड़ा सवाल—आधी क्षमता क्यों?
480 सीटों वाले विद्यालय में केवल 238 छात्राओं की मौजूदगी यह प्रश्न खड़ा करती है कि शेष सीटें खाली क्यों हैं या छात्राओं की उपस्थिति कम क्यों है। यदि विद्यालय में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो फिर अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग की अधिक से अधिक बालिकाओं तक इस योजना का लाभ क्यों नहीं पहुंच पा रहा है? यह विषय केवल विद्यालय प्रशासन ही नहीं, बल्कि समाज कल्याण विभाग के लिए भी गंभीर समीक्षा का विषय होना चाहिए।
निरीक्षण के बाद क्या बदलेगा?
सरकारी विद्यालयों में निरीक्षण अक्सर व्यवस्थाओं की समीक्षा और सुधार के उद्देश्य से किए जाते हैं। लेकिन ऐसे निरीक्षणों की वास्तविक उपयोगिता तभी सिद्ध होगी, जब दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित हो, खाली सीटों और कम उपस्थिति के कारणों का समाधान निकले तथा छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर आवासीय सुविधाएं स्थायी रूप से उपलब्ध कराई जाएं।
निरीक्षण के दौरान प्रभारी प्रधानाचार्या अलका राय, समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र कुमार, नवागत जिला समाज कल्याण अधिकारी बृजेश कुमार, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्राएं उपस्थित रहीं। अब यह देखना होगा कि आयोग अध्यक्ष के निर्देशों के बाद विद्यालय की व्यवस्थाओं में कितना व्यावहारिक सुधार दिखाई देता है।


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