संतकबीरनगर। साइबर ठगी और डिजिटल लेन-देन में होने वाली गलतियों से पीड़ित लोगों को राहत दिलाने के लिए चलाए जा रहे ‘क्रैक साइबर क्राइम’ अभियान के तहत साइबर सेल थाना कोतवाली खलीलाबाद पुलिस ने दो मामलों में कार्रवाई करते हुए कुल 22,000 रुपये की धनराशि वापस कराने में सफलता हासिल की है। पुलिस की इस कार्रवाई से दोनों पीड़ितों को आर्थिक राहत मिली है।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में साइबर अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने के लिए साइबर सेल को सक्रिय किया गया है। इसी क्रम में साइबर हेल्प डेस्क पर प्राप्त शिकायतों पर बैंक और संबंधित माध्यमों से समन्वय एवं प्रभावी पैरवी कर धनराशि वापस कराने की कार्रवाई की गई।
स्कूल फीस के दौरान गलत खाते में भेजे ₹12 हजार
पहले मामले में डिघा बाईपास निवासी रमजान अली ने 25 जुलाई 2026 को साइबर हेल्प डेस्क पर शिकायत दर्ज कराई थी। उनके अनुसार बच्चे की स्कूल फीस जमा करते समय गलती से 12,000 रुपये दूसरे मोबाइल नंबर से जुड़े खाते में ट्रांसफर हो गए। संबंधित व्यक्ति से संपर्क करने पर रकम वापस करने से इनकार कर दिया गया।
शिकायत मिलते ही साइबर हेल्प डेस्क पर तैनात आरक्षी रविकान्त कुशवाहा ने आवश्यक कार्रवाई शुरू की और संबंधित बैंक एवं अन्य माध्यमों से पैरवी की। पुलिस की कार्रवाई के बाद पीड़ित की पूरी 12,000 रुपये की धनराशि उसके बैंक खाते में वापस करा दी गई।
पार्सल के नाम पर हुई ठगी, ₹10 हजार वापस
दूसरे मामले में इस्लाम नगर, मगहर निवासी रोशनी खातून ने 21 जनवरी 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक अज्ञात व्यक्ति ने पार्सल भेजने के नाम पर झांसा देकर उनके बैंक खाते से 20,000 रुपये की धनराशि धोखाधड़ीपूर्वक दूसरे बैंक खाते में स्थानांतरित करा ली।
साइबर हेल्प डेस्क ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक और अन्य माध्यमों से संपर्क कर धनराशि की रिकवरी के लिए प्रयास किया। पुलिस के मुताबिक कार्रवाई के परिणामस्वरूप पीड़िता के खाते में 10,000 रुपये वापस कराए गए।
इस प्रकार दोनों मामलों में कुल 22,000 रुपये पीड़ितों को वापस मिले।
त्वरित शिकायत से बढ़ती है रकम वापस मिलने की संभावना
साइबर अपराध के मामलों में समय पर शिकायत करना बेहद महत्वपूर्ण है। डिजिटल लेन-देन के बाद शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर संबंधित बैंक खातों और लेन-देन की कड़ियों पर कार्रवाई की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में पीड़ितों को ठगी के बाद चुप रहने या आरोपी से स्वयं बातचीत में समय गंवाने के बजाय तत्काल आधिकारिक माध्यमों से शिकायत करनी चाहिए।
हालांकि, इन दोनों मामलों में पुलिस की कार्रवाई से पीड़ितों को राहत मिली है, लेकिन साइबर अपराध की बढ़ती प्रकृति को देखते हुए केवल धनराशि वापस कराना पर्याप्त नहीं है। साइबर जागरूकता, त्वरित शिकायत, बैंकिंग संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय और ठगी करने वाले नेटवर्क तक पहुंचना साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए समान रूप से जरूरी है।
साइबर सेल टीम की भूमिका
कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली खलीलाबाद जयप्रकाश दूबे, अपराध निरीक्षक एवं प्रभारी साइबर सेल वीरेन्द्र कुमार यादव, आरक्षी रविकान्त कुशवाहा, महिला आरक्षी शिवांगी सिंह, रिक्रूट आरक्षी अनुज शुक्ला एवं रिक्रूट आरक्षी ऋतिक वर्मा शामिल रहे।
पुलिस की अपील—ठगी होते ही करें शिकायत
संतकबीरनगर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी अनजान कॉल, लिंक, ओटीपी, क्यूआर कोड या ब्लैकमेलिंग के झांसे में न आएं। OTP, PIN, CVV और बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
यदि साइबर ठगी हो जाए तो बिना देरी किए 1930 हेल्पलाइन पर सूचना दें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। समय पर शिकायत साइबर ठगी की रकम को रोकने या वापस कराने की कार्रवाई में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
समीक्षात्मक तौर पर देखें तो ₹22 हजार की वापसी पुलिस की त्वरित कार्रवाई का सकारात्मक परिणाम है, लेकिन यह घटना आम नागरिकों के लिए भी चेतावनी है कि डिजिटल भुगतान में एक छोटी-सी गलती या साइबर ठगों के झांसे में आने से सीधे आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसलिए सतर्कता और तत्काल शिकायत ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी पहला कदम है।

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