(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। जिलाधिकारी आलोक कुमार के निर्देश पर गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में जिला वृक्षारोपण समिति, जिला पर्यावरण समिति एवं जिला गंगा समिति की संयुक्त बैठक आयोजित हुई। बैठक में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों की प्रगति के साथ-साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और नालों के सीवेज ट्रीटमेंट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की गई।
जिला वृक्षारोपण समिति की समीक्षा के दौरान प्रभागीय वनाधिकारी हरिकेश यादव ने बताया कि वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 के तहत संतकबीरनगर में वन विभाग को 14.50 लाख तथा अन्य विभागों को 19.07 लाख पौधरोपण का लक्ष्य दिया गया है। इस तरह जिले में कुल 33.57 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित है। बैठक में खास तौर पर अन्य विभागों द्वारा कराए गए पौधरोपण की जियोटैगिंग की प्रगति पर चर्चा हुई।
सीडीओ ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि पौधरोपण की जियोटैगिंग का कार्य इसी माह अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। समीक्षा से यह संकेत भी मिला कि पौधे लगाने के साथ उनकी डिजिटल निगरानी और सत्यापन पर प्रशासन का जोर है। हालांकि, पौधरोपण की वास्तविक सफलता केवल लक्ष्य पूरा करने से नहीं, बल्कि लगाए गए पौधों के संरक्षण और उनके जीवित रहने की दर से तय होगी। ऐसे में आगामी समीक्षा में पौधों के संरक्षण की स्थिति पर भी ठोस रिपोर्ट लेना महत्वपूर्ण होगा।
कचरा प्रबंधन और प्रदूषण पर फोकस
जिला पर्यावरण समिति की बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुपालन की समीक्षा की गई। स्थानीय निकाय क्षेत्रों से निकलने वाले नगरीय ठोस कचरे के संग्रहण से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक परिवहन के लिए सेकेंडरी स्टोरेज फैसिलिटी की स्थिति पर चर्चा हुई। जैव चिकित्सा अपशिष्ट के निस्तारण तथा वाहनों से होने वाले प्रदूषण से संबंधित बिंदुओं की भी समीक्षा की गई।
जिला गंगा समिति की बैठक में शहरी क्षेत्रों से निकलने वाले नालों और ड्रेन्स के चिन्हीकरण तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की स्थिति पर बिंदुवार चर्चा की गई। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई और व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए गए।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी हरिकेश यादव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसके तिवारी, जिला उद्यान अधिकारी समुद्रगुप्त मल्ल, जिला पंचायतराज अधिकारी अरुण कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बस्ती सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो बैठक में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई अहम मुद्दे उठे, लेकिन इन निर्देशों की वास्तविक प्रभावशीलता अब उनके जमीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। पौधरोपण की जियोटैगिंग, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, प्रदूषण नियंत्रण और सीवेज प्रबंधन की नियमित निगरानी ही तय करेगी कि पर्यावरण संरक्षण के ये प्रयास कागजी उपलब्धि तक सीमित रहते हैं या धरातल पर स्थायी बदलाव लाते हैं।

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