(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। विभाजन की पीड़ा केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज एक घटना नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के विस्थापन, अपनों से बिछड़ने और असहनीय पीड़ा की ऐसी स्मृति है, जिसकी कसक आज भी महसूस की जाती है। इसी ऐतिहासिक त्रासदी को स्मरण करते हुए भाजपा कार्यालय संतकबीरनगर में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में सदर विधायक अंकुर राज तिवारी ने सहभागिता करते हुए विभाजन की त्रासदी से जुड़े पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
विधायक ने कहा कि विभाजन भारतीय इतिहास की हृदयविदारक त्रासदियों में से एक है। इसके दौरान बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों ने जान गंवाई, जबकि असंख्य परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह स्मृति दिवस उन लोगों के संघर्ष, पीड़ा और बलिदान को याद करने का अवसर है, जिन्होंने विभाजन की विभीषिका में अपना सर्वस्व खो दिया।
इतिहास को याद करने के साथ भविष्य की जिम्मेदारी भी समझने की जरूरत
अंकुर राज तिवारी ने कहा कि इतिहास की त्रासद घटनाओं को याद करने का उद्देश्य केवल अतीत के दर्द को दोहराना नहीं, बल्कि उनसे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना भी होना चाहिए। उन्होंने राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
उनके अनुसार, विभाजन की त्रासदी यह संदेश देती है कि सामाजिक एकता और राष्ट्रीय हितों के प्रति सजग रहना किसी भी लोकतांत्रिक समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। नई पीढ़ी को इतिहास के इन अध्यायों से परिचित कराने के साथ यह भी समझाना जरूरी है कि शांति, सौहार्द और राष्ट्रीय एकता की कीमत क्या है।
भाजपा कार्यालय में जुटे वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी धर्मेंद्र सिंह रहे। जिलाध्यक्ष नीतू सिंह, जिला प्रभारी अजय सिंह गौतम, विधायक गणेश चंद्र चौहान, मेंहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी, पूर्व सांसद इन्द्रजीत मिश्र सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन जिला उपाध्यक्ष ज्ञानेंद्र मिश्रा ने किया। जिला उपाध्यक्ष सत्यपाल पाल, जिला उपाध्यक्ष अमर राय तथा पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्षगण की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
स्मृति दिवस का संदेश: विभाजन की पीड़ा न दोहराए इतिहास
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की संगोष्ठी में श्रद्धांजलि के साथ राष्ट्र की एकता और अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश दिया गया। सदर विधायक ने विभाजन की विभीषिका में अपना सर्वस्व खोने वाले सभी देशवासियों को नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो ऐसे आयोजन तब अधिक सार्थक होते हैं, जब ऐतिहासिक स्मृतियों को राजनीतिक विमर्श से आगे बढ़ाकर सामाजिक एकता, परस्पर सम्मान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए सकारात्मक सीख में बदला जाए। विभाजन की पीड़ा को याद करने के साथ यह संकल्प भी जरूरी है कि देश की एकता और सामाजिक सौहार्द को किसी भी परिस्थिति में कमजोर न होने दिया जाए।

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