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बच्चों में लिवर की बीमारी के संकेतों को न करें नजरअंदाज, समय पर पहचान और सही देखभाल है सबसे बड़ा बचाव


(आलेख मोहम्मद सईद पठान एडिटर मिशन संदेश)

आज की बदलती जीवनशैली और खानपान का असर सिर्फ वयस्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं। जंक फूड, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ, मीठे पेय और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण बच्चों में फैटी लिवर और अन्य लिवर संबंधी समस्याओं के मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

बच्चों में क्यों बढ़ रही हैं लिवर की समस्याएं?

आज अधिकांश बच्चे नियमित रूप से चिप्स, चॉकलेट, पैकेटबंद स्नैक्स, फास्ट फूड और शुगर युक्त पेय पदार्थों का सेवन करते हैं। इन खाद्य पदार्थों में मौजूद प्रिजर्वेटिव, अतिरिक्त नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा धीरे-धीरे लिवर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इसके साथ ही मोबाइल और टीवी के कारण शारीरिक गतिविधियां कम होने से मोटापा और फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है।

किन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज?

बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार यदि बच्चे में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए—

आंखों या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया), बार-बार उल्टी आना या मतली महसूस होना, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द, भूख कम लगना, पेट फूलना या लगातार भारीपन महसूस होना, अत्यधिक कमजोरी और सुस्ती, गंभीर स्थिति में दिख सकते हैं ये संकेत, यदि लिवर की बीमारी बढ़ जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में बच्चे में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं—

पेट में पानी भरना, पूरे शरीर या पैरों में सूजन, मल या उल्टी में खून आना, शरीर के अन्य हिस्सों से असामान्य रक्तस्राव, दौरे पड़ना या मानसिक भ्रम, ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए अस्पताल पहुंचना आवश्यक है।लिवर को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे पहले बीमारी का कारण जानना जरूरी है। फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, संक्रमण या जन्मजात लिवर रोग—हर स्थिति का उपचार अलग हो सकता है।

बच्चों की दिनचर्या में इन बातों को शामिल करें—ताजे फल और हरी पत्तेदार सब्जियां दें। साबुत अनाज और उम्र के अनुसार पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें।, जंक फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और शुगर युक्त पेय सीमित करें। बच्चे को रोजाना शारीरिक गतिविधियों और खेलकूद के लिए प्रेरित करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं। नारियल पानी भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है।डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या दर्द निवारक दवाएं न दें।

समय पर जांच क्यों है जरूरी?

यदि बच्चे में लगातार पीलिया, पेट दर्द, भूख की कमी या अन्य लक्षण बने रहें, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ से जांच कराना आवश्यक है। समय पर जांच और उचित उपचार से अधिकांश लिवर संबंधी समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है।

निष्कर्ष

बच्चों का लिवर स्वस्थ रखना केवल इलाज का नहीं, बल्कि सही खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय पर चिकित्सकीय सलाह का विषय है। माता-पिता यदि शुरुआती संकेतों को पहचान लें और बच्चों की जीवनशैली में आवश्यक सुधार करें, तो भविष्य में गंभीर लिवर रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर:

यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता और जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि बच्चे में पीलिया, लगातार पेट दर्द, उल्टी, सूजन या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत योग्य बाल रोग विशेषज्ञ या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श लें। किसी भी दवा या उपचार की शुरुआत डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।

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