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छात्रवृत्ति के 3.25 करोड़ के वितरण में कथित वित्तीय अनियमितता, एक आरोपी गिरफ्तार


  • 46 शैक्षिक संस्थानों में ₹3.25 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति पर उठे सवाल; खलीलाबाद पुलिस ने वांछित आरोपी को दबोचा

(रिपोर्ट -मोहम्मद सईद पठान एडिटर मिशन संदेश समाचार पत्र)

संतकबीरनगर। भारत सरकार की अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना के तहत विद्यार्थियों के लिए जारी धनराशि के वितरण में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। 46 शैक्षिक संस्थानों में कुल ₹3,25,96,960 की छात्रवृत्ति के वितरण में प्रथम दृष्टया व्यापक वित्तीय अनियमितता पाए जाने के मामले में कोतवाली खलीलाबाद पुलिस ने एक वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, देवव्रत चौधरी पुत्र सर्वजीत, निवासी तिलठा, थाना महुली को तिलठा से गिरफ्तार किया गया। आरोपी के विरुद्ध कोतवाली खलीलाबाद में मु0अ0सं0 526/2025 के तहत धारा 467, 468, 471, 409 और 120(बी) भादवि में मुकदमा दर्ज है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश करने के लिए रवाना किया।

46 संस्थानों की जांच में सामने आया मामला

मामला वर्ष 2021-22 और 2022-23 में संचालित भारत सरकार की अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजनाओं से जुड़ा है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा संदिग्ध शैक्षिक संस्थाओं और छात्र-छात्राओं के संबंध में मिले निर्देशों के बाद जनपद में संदिग्ध संस्थानों का निरीक्षण और सत्यापन कराया गया था।

पुलिस के मुताबिक, सत्यापन के दौरान 46 शैक्षिक संस्थानों में छात्रवृत्ति वितरण से जुड़ी प्रथम दृष्टया गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद संबंधित शैक्षिक संस्थानों, Institute Nodal Officers (INO), Head of Institute (HOI) तथा अनियमितताओं में कथित रूप से शामिल अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए मुकदमा दर्ज कराया गया।

सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं, छात्रवृत्ति के वास्तविक लाभार्थियों का भी

यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि छात्रवृत्ति की धनराशि किसी निजी संस्था की नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के कल्याण के लिए सरकारी योजना के तहत आवंटित सार्वजनिक धन है। ऐसे में जांच का दायरा केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं होगा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि ₹3.25 करोड़ से अधिक की धनराशि में कथित अनियमितता आखिर किस स्तर पर हुई? क्या वास्तविक विद्यार्थियों के खातों में छात्रवृत्ति पहुंची या रिकॉर्ड और कागजों के स्तर पर ही वितरण दिखाया गया? सत्यापन प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई तो उसकी जिम्मेदारी किसकी थी? और यदि कई संस्थान जांच के घेरे में हैं तो उनकी भूमिका की जांच किस स्तर तक पहुंची है?

इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पुलिस कार्रवाई को मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है, लेकिन सरकारी छात्रवृत्ति के धन की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होना ही इस प्रकरण की असली कसौटी होगी।

पुलिस टीम ने की गिरफ्तारी

आरोपी की गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में वरिष्ठ उपनिरीक्षक प्रमोद कुमार यादव, उपनिरीक्षक धर्मनाथ यादव और कांस्टेबल सत्यम सिंह शामिल रहे।

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय के पर्यवेक्षण में कार्रवाई किए जाने की बात पुलिस ने कही है।

नोट: मामले में लगाए गए आरोपों और धाराओं का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। आरोपी को दोषी ठहराना न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

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